शुक्रवार, 31 अक्टूबर, 2014 | 19:02 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
विद्या प्रकाश ठाकुर ने भी राज्यमंत्री पद की शपथ लीदिलीप कांबले ने ली राज्यमंत्री पद की शपथविष्णु सावरा ने ली मंत्री पद की शपथपंकजा गोपीनाथ मुंडे ने ली मंत्री पद की शपथचंद्रकांत पाटिल ने ली मंत्री पद की शपथप्रकाश मंसूभाई मेहता ने ली मंत्री पद की शपथविनोद तावड़े ने मंत्री पद की शपथ लीसुधीर मुनघंटीवार ने मंत्री पद की शपथ लीएकनाथ खड़से ने मंत्री पद की शपथ लीदेवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
...यहां 2 घंटे में भरता है एक घड़ा पानी
चणास्मा, एजेंसी First Published:12-12-12 10:57 AMLast Updated:12-12-12 11:02 AM
Image Loading

गुजरात के पाटन जिले में एक पंचायत है सुणसर। इस पंचायत में आने वाले चार गांव ऐसे हैं जहां मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के तमाम दावे खोखले और साबित होते हैं। यहां के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। खेतों में पानी नहीं है, लेकिन ओएनजीसी यहां के खेतों से तेल जरूर निकालती है।

पानी की समस्या का आलम यह है कि पीने के पानी के लिए दो घंटे की मशक्कत के बाद एक घड़ा पानी नसीब हो पाता है और घर के अन्य काम तथा खेत के लिए तो पानी तीन किलोमीटर दूर बने तालाबों से पाइप के जरिये लाया जाता है।

पंचायत के गांव अम्बलीपुरा गांव की स्मिता बेन अपने दो बच्चों के साथ एक कुएं से प्लास्टिक के पांच लीटर वाले गैलन में रस्सी बांधकर पानी निकाल रही थी। कुएं में झांककर देखने पर पानी कहीं नजर नहीं आता। नजर आते हैं तो कुछ छोटे-छोटे गड्ढे जिनमें रिस-रिस कर पानी जमा होता है और स्मिता के बच्चे उससे पानी निकालते हैं और वह खुद उन्हें घड़े में भरती है।

यह पूछने पर कि कितनी देर में उनका यह घड़ा भर जाता है, वह बताती है कि हम 10.30 बजे आए थे। लगभग 12 बज गए होंगे और घड़ा आधे से अधिक ही भरा है। उसे जब पता चलता है कि उसकी बातचीत दिल्ली के छापा वालों (पत्रकारों) से हो रही है तो वह अपना दुखड़ा सुनाना शुरू करती है। वह कहती है कि कुछ कीजिए आप लोग। पानी की बड़ी समस्या है यहां। दो घंटे की मशक्कत के बाद एक घड़ा पानी भरता है। वह भी पीने लायक नहीं होता। दिन पानी भरने में ही गुजर जाता है। बाकी काम के लिए फिर समय कहां बचता है।

कुएं के बगल में एक बड़ा सा तालाब है। वह भी सूखा पड़ा है। सड़क किनारे तालाब पर गांव वाले एक मंदिर बना रहे हैं। मंदिर बनाने के लिए तीन किलोमीटर तालाब से पाइप के जरिये पानी लाया जाता है और फिर ईंट दर ईंट मंदिर का निर्माण हो रहा है। गांव के ही 35 वर्षीय कीर्ति एम धाला बताते हैं कि यह मातृ मां का मंदिर बन रहा है। तालाब और कुएं सूखे हुए हैं। हम मंदिर बना रहे हैं ताकि हमें मां के आर्शीवाद से पानी मिले। हम गुजरातियों में देवी-देवताओं के प्रति आस्था बहुत होती है। हमें अपनी सरकारों पर नहीं, देवताओं पर भरोसा है।

वह कहते हैं कि पीने को पानी नहीं है, खेतों में तीन किलोमीटर दूर बेचराजी के तालाब से पानी लाना पड़ता है। घर की महिलाएं नहाने के लिए इन तालाबों तक जाती हैं। सड़क किनारे मिलने वालों तालाबों के निकट ऐसे दृश्य आसानी से देखे जा सकते हैं, वहीं दूसरी ओर खेतों से ओनजीसी के मशीनों को जगह-जगह तेल निकालते भी देखा जा सकता है।

धाला बताते हैं कि यह विडंबना ही है कि निकालने को तेल है, लेकिन पीने को पानी। कैसा विकास है ये। वह कहते हैं कि शुक्र है कि ओएनजीसी का संयंत्र लग गया तो यहां की सड़कें बन गई हैं। तेल निकालने के दौरान निकलने वाला पानी भी जमा कर हम अपना काम चला लेते हैं।

सुणसर पंचायत में सुणसर, अम्बलीपुरा, लक्ष्मीपुरा और पेटापुरा गांव है। पंचायत प्रमुख चमनजी दरबार ने कहा कि मोदी सरकार शहरों में और बड़े-बड़े बिल्डरों का काम करती है। किसानों को कौन पूछता है।

 
 
 
टिप्पणियाँ