शनिवार, 30 मई, 2015 | 01:43 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का डबल झटका, एलजी ही करेंगे नियुक्ति   क्या दाऊद को जल्द भारत ला रही सरकार बीएमडब्ल्यू ने पेश किया ग्रान कूपे का नया मॉडल  चीन में आमिर का एलियन अवतार हुआ हिट चीन में आमिर का एलियन अवतार हुआ हिट सायना की हार के साथ भारतीय चुनौती समाप्त 26 लड़कियों से रेप के आरोपी टीचर को मौत की सजा दिल्ली एयरपोर्ट पर रेडियोएक्टिव पदार्थ लीक से मचा हड़कंप, काबू में लीकेज स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में फिर से भारतीयों का बोलबाला सरकारी नौकरीः 400 से ज्यादा दसवीं पास से लेकर इंजीनियर तक वैकेंसी
चेहरे से नहीं शरीर से झलकती हैं आपकी भावनाएं
लंदन, एजेंसी First Published:30-11-12 03:03 PM
Image Loading

कहा जाता है कि आपका चेहरा आपकी सोच का आईना होता है, लेकिन एक नए अध्ययन के शोधकर्ताओं की मानें तो आपका चेहरा नहीं, बल्कि आपका शरीर यह दर्शाता है कि आपके मन में चल क्या रहा है।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, जब पुरुषों और महिलाओं को कुछ अन्य व्यक्तियों के सिर से कंधे तक की तस्वीरें देकर उनके हावभाव को पहचानने का काम दिया गया तो वे ऐसा नहीं कर पाए, लेकिन जब उन्हें उस व्यक्ति की पूरी तस्वीर दी गई तो वे इसे बेहतर ढंग से कर पाए।

इस्राइली और अमेरिकी शोधकर्ताओं ने लोगों को एंडी मरे और राफेल नाडाल समेत कई टेनिस खिलाड़ियों की तस्वीरें दिखाईं। ये लोग विंबल्डन में अंकों की बढ़त होने पर जीत और अंकों में गिरावट आने पर हार का सामना कर चुके हैं। सिर्फ चेहरों की तस्वीरें देने पर लोग विजेताओं को हारने वालों से अलग नहीं कर पाए थे।

हालांकि जब उन्हें ऐसी तस्वीरें दी गईं, जिनमें चेहरे के साथ शरीर भी था, या फिर सिर्फ शरीर ही था तो उनसे वे आसानी से विजेताओं को पहचान पाए। विजेताओं की पहचान में खिलाड़ियों के हाथ अहम भूमिका निभाते हैं। खिलाड़ियों की भिंची हुई मुट्ठी उनकी जीत को दर्शाती है और उनकी बाहर की ओर खुली हुई उंगलियां हार की कहानी कहती हैं।

अपने इस प्रयोग को और विस्तार देने के लिए लोगों को अलग-अलग हावभावों वाले लोगों की तस्वीरें दिखाई गईं। इनमें अपने घर का नया रूप देखकर हुई खुशी से लेकर अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद हुआ दुख तक शामिल था।

इस बार भी जब लोगों को सिर्फ चेहरों की तस्वीरें दिखाई गईं तो वे इन हावभावों को पहचान नहीं पाए। अधिकतर बार तो उन्होंने खुशी के भावों को दुख के भावों से भी ज्यादा नकारात्मक समझ लिया।

इसे और विस्तार देते हुए उन्होंने नकली तस्वीरें तैयार कीं। जहां खुश चेहरे को दुखी शरीर पर लगाया गया और दुखी चेहरे को खुश शरीर पर। तब जब लोगों को पहचानने के लिए ये तस्वीरें दी गईं तो शरीर के हावभाव को ही ज्यादा तवज्जो मिली। शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारी भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। हमारे भावों को व्यक्त करने के लिए हमारे चेहरे की मांसपेशियां ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पातीं।

येरूशलम के हेब्रियू विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर हिलेल एवीजर ने कहा कि इस अध्ययन के परिणाम शोधकर्ताओं की यह जानने में मदद कर सकते हैं कि भावुक परिस्थितियों के दौरान शरीर और चेहरे के हावभाव आपस में कैसे तालमेल करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत सूक्ष्म भावों को पहचानने के लिए अभी भी चेहरों को पढ़ना महत्वपूर्ण है।

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
Image Loadingअंतिम 11 में जगह मिलने की नहीं थी उम्मीद : सरफराज
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने वाले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के सबसे युवा बल्लेबाज सरफराज खान का कहना है कि उन्हें क्रिस गेल, ए.बी. डीविलियर्स और विराट कोहली जैसे विध्वंसक बल्लेबाजों के बीच अंतिम 11 में जगह मिलने का यकीन नहीं था और नम्बर छह की बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर मौका दिये जाने से उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड