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शहर में 90 फीसदी घरों पर जल शुल्क बकाया
First Published:02-05-12 11:25 PM
ग्रेटर नोएडा। हमारे संवाददाता
पानी की मिठास और आपूर्ति के मामले में ग्रेटर नोएडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पहले स्थान पर है। लेकिन, पानी के बिलों के भुगतान के मामले में सबसे पीछे है। आवंटियों पर प्राधिकरण का करीब छह करोड़ रुपये पानी का बिल बकाया है। संबंधित विभाग से आवंटियों को बिल जमा करने के लिए बार-बार नोटिस भेजे जा रहे हैं लेकिन, लोग पानी का बिल जमा नहीं कर रहे हैं।ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वर्षो से चौबीसों घंटे बिजली-पानी सप्लाई के दावे करता रहा है। दोनों ही दावों में शत प्रतिशत सच्चाई भले ही न हो लेकिन, एनसीआर के अन्य उप नगरों की तुलना में बेहतर है। शहर में अभी मात्र तीन लाख की आबादी होने के बावजूद पानी की करीब 40 टंकियां हैं। इन्हें खाली होने की सूरत में पानी संचय करने के लिए यूजीआर हैं। बिजली सप्लाई प्राइवेट कम्पनी एनपीसीएल देखती है। लिहाजा, तीन महीने के बिल बकाया होने पर बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है। मगर, पानी सप्लाई प्राधिकरण का अर्बन विभाग देख रहा है। विभाग के अफसरों को बिलों के भुगतान की कोई चिंता ही नहीं है। पिछले कुछ महीनों में जब से पानी के बिलों के भुगतान की समीक्षा की जाने लगी है, तब कहीं जाकर बकायादारों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ाें को देखें तो करीब 90 फीसदी आवंटियों पर पानी बिलों का भुगतान बकाया है। विभागीय अफसर इसकी वजह कुछ मकानों में कॉलेजों के छात्रों के रहने और कुछ में किराएदार रहना बता रहे हैं। बिल मूल आवंटी के नाम जारी किया जाता है लेकिन, किराएदार अथवा छात्र बिल लेने के बाद उसे फेंक देते हैं। मकान मालिक को इसकी जानकारी ही नहीं हो पाती। जिन मकानों में आवंटी खुद रह रहे हैं, वे भी पानी बिल जमा कराने को लेकर बेहद लापरवाही दिखाते हैं।---सख्ती नहीं बरत सकता प्राधिकरणअर्बन सर्विसेज के महाप्रबंधक आरके देव का कहना है कि बकाएदारों ने बिलों का भुगतान जल्द नहीं किया तो उनके पानी कनेक्शन काटे जाएंगे। समस्या यह है कि प्राधिकरण के पास सख्ती बरतने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में लोग लापरवाही बरत रहे हैं।ं
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