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घर के पास खेलने की जगह नहीं मिलने पर नन्हें शिखर को जाने क्या सूझा कि उसने देश के खेलमंत्री को ही पाती लिख डाली। जिसमें उसने आवासीय योजनाएं बसाने की सरकारी की नीति पर चोट की। उसने कहा कि रहने के लिए तो लोगों को जगह मिल रही हैं, पर बच्चों के खेलकूद के लिए कोई केंद्र नहीं बन रहा। इस पर खेल मंत्री ने शहरी विकास मंत्री को खत लिखकर आवासीय नीति में बदलाव करने की वकालत की है।
वसुंधरा सेक्टर 5 में रहने वाले शिखर यादव एयरफोर्स स्कूल हिंडन एयरबेस में कक्षा छह का छात्र है। घर के आसपास खेलने के लिए कोई जगह नहीं होने पर उसे काफी पीड़ा हु?ई तो उसे केंद्रीय खेल मंत्री तक पहुंचाने की ठान ली। ईमेल के माध्यम से शिखर ने खेल मंत्री एमएस गिल को मार्मिक पत्र लिखा। जिसमें उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और निजी बिल्डरों पर चोट की। उसने कहा कि लोगों के रहने के लिए घर और फ्लैट धड़ाधड़ बनाए जा रहे हैं। सरकारी एजेंसियां आवासीय योजनाएं बसाकर जमीन बिल्डरों को बेच रही हैं। लेकिन बच्चों के लिए खेलकूप केंद्र बनाने के लिए कोई नीति तय नहीं है। जगह नहीं होने के कारण बच्चाे अपनी पसंद का कोई खेल नहीं खेल पाते। सरकारी एजेंसियां और बिल्डर केवल पैसा कमाने पर ध्यान दे रहे हैं। बच्चों के खेलकूद की उन्हें कोई चिंता नहीं है। जब बुनियादी स्तर पर ही बच्चों को खेलकूद की सुविधा नहीं मिलेगी तो वह देश को खेल प्रतिभाएं कैसे मिल पाएंगी। बच्चाे ने खेलमंत्री से ऐसी नीति बनाने की मांग की क हर आवासीय योजना में एक खेल स्टेडियम या मैदान बनाया जा सकें। छोटे बच्चाे के पत्र ने खेल मंत्री को भावविभोर कर दिया और उन्होंने तत्काल केंद्रीय शहरी आवास मंत्री एस जयपाल रेड्डी को खत लिख दिया। इस खत में खेल मंत्री ने कहा कि शहरी आवासीय योजनाओं में खेल के मैदान बनाने के लिए एक स्पष्ट नीति बनाई जाएगी, ताकि वहां रहने वाले लोगों और बच्चों को खेलने की सुविधा मिल सकें। इसके लिए एक निश्चित जगह आवासीय योजनाओं के बीच में छोड़ी जाए। उस खेल के मैदान की देखभाल और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

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