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अस्पताल के गेट पर ही हुआ बच्ची का जन्म
कार्यालय संवाददाता, गाजियाबाद
First Published:08-02-10 11:00 PM
Last Updated:08-02-10 11:25 PM
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महिला अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण एक महिला को अस्पताल के गेट पर ही डिलवरी हो गई। परिसर में मां व बच्चे को देख सभी के होश उड़ गए। आनन फानन में मां व बच्चे को भर्ती करके मामले को शांत कर दिया गया। लेकिन इस लापरवाही पर जिलाधिकारी द्वारा जांच बैठने पर मामला चार्चाओं में आ गया है।


दरअसल पल्स पोलियो अभियान के दौरान रविवार को जिलाधिकारी लाव लश्कर के साथ खोडा कालोनी में बच्चे को दवा पिलाने पहुंचे। वहीं पर इस परिवार ने उनसे जो शिकायत की उसे सुनकर मौजूद स्वास्थ्य अधिकारियों के होश उड़ गए। खोड़ा निवासी राजेंदA ने बताया कि उनकी पत्नी बबीता को बच्चा होना था। दर्द से चिल्लाती अपने पत्नी को लेकर वह पांच फरवरी को महिला अस्पताल पहुंचे। वहां मौजूद नर्सो ने उन्हे एडमिट करने के लिए पैसों की मांग की। उन्होंने इस संबंध में डाक्टरों से भी कहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी। दर्द से चिल्लती उनकी पत्नी अस्पताल परसिर में जमीन पर ही बैठ गई व वहीं पर उसने लड़की को जन्म दिया। परिसर में जमीन पर करहाती महिला व उसके नवजात शिशु को देख सभी दंग रह गए। इतने में इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को लगी तो उन्होंने तुरंत ही उनकी पत्नी को एडमिट कर लिया। बाद में सात फरवरी को उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।


शिकायत के बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मिश्र को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में महिला अस्पताल की डिप्टी सीएमएस डा. सुचिता दिनकर का कहना है कि लेबर पेन होने के बाद यदि कोई मरीज समय से अस्पताल में नहीं आए तो इसमें विभाग कुछ नहीं कर सकता। महिला को इतना दर्द था कि वह अस्पताल के भीतर तक भी नहीं पहुंच सकी। पता लगते ही उसको तुरंत दाखिल कर लिया गया।

कई बार हो चुके हैं इस प्रकार के मामले
महिला अस्पताल में लेबर रूम से बाहर बच्चा पैदा होने के काई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। पिछले साल एक महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दिया। काफी समय तक महिला व उसका बच्चा गेट पर पड़े रहे। बाद में अस्पताल कर्मचारियों ने उसे वहां से उठाकर लेबर रूम में भर्ती किया। इससे पहले डिलीवरी के लिए आए एक परिवार की महिला को टैम्पू में ही बच्चे को जन्म दे गिया। भीड़ के कारण महिला के पति को पर्चा बनवाने व भर्ती की रसीद कटाने में समय लग गया। इतने समय तक महिला दर्द नहीं सह सकी। लेकिन शुक्र है कि जितने भी मामले हुए सभी नॉर्मल रहे व सभी में मां व बच्चे दोनों सुरक्षित रहे।

 
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