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अवैध निर्माण से दिल्ली के सीमित संसाधनों पर बढ़ा दवाब

हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अवैध निर्माणों ने राजधानी के सीमित बुनियादी ढांचे और संसाधनों पर गंभीर दबाव डाला है। हाईकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि समुचित नीति बनाई जाए ताकि दिल्ली वाले शांति से जीवन गुजार सके।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की पीठ ने कहा है कि दिल्ली सीमाओं से घिरा होने के कारण जमीन सीमित है लेकिन अवैध निर्माण का प्रभाव के कारण यहां जनसयंख्या में वृद्धि हुई जिससे संसाधनों पर दवाब बढ़ा, जिससे यहां पर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी समस्याएं सामने आई। पीठ ने कहा है कि इससे मौजूदा बुनियादी ढंचा व संसाधानों जैसे पानी पर गंभीर प्रभाव पड़ा। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के संबंध में एक नीति थी। पीठ ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम में ऐसे प्रावधान हैं जो सामंजस्यपूर्ण नीतियों से भू-उपयोग एवं संसाधनों के विकास को नियंत्रण करता है ताकि बेतरतीब तरीके से विकास न हो। पीठ ने स्थिति नियंत्रण से बाहर हो, इससे पहले केंद्र सरकार को राज्य सरकार के संपर्क करने और इस दिशा में नीति बनाने को कहा है। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिया है। याचिका में लाजपत राय मार्ग व लोधी रोड के पास अमिरखुशरो पार्क में नाइट शेल्टर गिराए जाने के खिलाफ दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस शेल्टर के गिराए जाने से 50 से 60 बच्चे व 60 महिलाएं बेघर हो गई है। हालांकि हाईकोर्ट इस तोडफोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। पीठ ने कहा है कि दूसरे पक्षों को सुने बगैर रोक नहीं लगाई जा सकती। हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र व दिल्ली सरकार एवं डीडीए को नोटिस जारी पर जवाब मांगा है। पीठ ने दिल्ली शहरी आश्रय विकास बोर्ड से भी जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 3 अगस्त को होगी। साथ ही सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे बेघरों को रहने का समुचित प्रबंध करे।

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  • Web Title:ncreased pressures on Delhi's limited resources by illegal construction