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गांगुली की वजह से कोच नहीं बने थे चैपल : गावस्कर
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:09-11-11 12:32 PM
Last Updated:09-11-11 12:33 PM
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल भले ही हमेशा यह कहते आए हों कि 2005 में सौरव गांगुली के समर्थन की वजह से वह कोच बने थे लेकिन सुनील गावस्कर ने इसे गलत धारणा करार दिया।
गावस्कर ने कहा कि वह लगातार कह रहे हैं कि सौरव गांगुली ने उन्हें कोच का पद दिलाया जो गलत है। उन्होंने गांगुली के बारे में और भी कई गलत धारणायें पाल रखी है। पहली तो यही है कि गांगुली ने उन्हें पद दिलाया।
उन्होंने कहा कि गांगुली ने उन्हें पद नहीं दिलाया। उससे सलाह ली गई होगी लेकिन उसने चैपल को कोच का पद नहीं दिलाया। यह समिति का फैसला था। यह पहली गलत धारणा थी और चैपल ने दादा के बारे में कई अन्य गलत धारणायें पाल रखी है।
गावस्कर ने यह भी कहा कि चैपल और गांगुली के संबंधों में तनाव का कारण विचारों में टकराव था। उन्होंने एनडीटीवी से कहा कि चैपल की अपनी राय थी और पांच सात साल से कप्तान रहने के कारण गांगुली की अपनी। दोनों में वैचारिक मतभेद हो गया था जो कभी भी हो सकता है। भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाना था और चैपल के साथ दो साल के प्रयोग के बाद ऐसा हुआ भी।
गावस्कर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट के बारे में बोलकर किताब बेचना अब एक शिगूफा बन गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार और भारत की आबादी और यहां क्रिकेट किस कदर लोकप्रिय है, यह देखकर ऐसा ही लगता है। ऑस्ट्रेलिया में कितनी किताबें 2000, 5000 या 10000 बिकेंगी। भारत में बिक्री दुगुनी से भी अधिक होती है। यही वजह है कि भारतीय क्रिकेटरों के बारे में बोलकर किताब बेचने का तरीका तलाश लिया है।
गावस्कर ने कहा कि वह लगातार कह रहे हैं कि सौरव गांगुली ने उन्हें कोच का पद दिलाया जो गलत है। उन्होंने गांगुली के बारे में और भी कई गलत धारणायें पाल रखी है। पहली तो यही है कि गांगुली ने उन्हें पद दिलाया।
उन्होंने कहा कि गांगुली ने उन्हें पद नहीं दिलाया। उससे सलाह ली गई होगी लेकिन उसने चैपल को कोच का पद नहीं दिलाया। यह समिति का फैसला था। यह पहली गलत धारणा थी और चैपल ने दादा के बारे में कई अन्य गलत धारणायें पाल रखी है।
गावस्कर ने यह भी कहा कि चैपल और गांगुली के संबंधों में तनाव का कारण विचारों में टकराव था। उन्होंने एनडीटीवी से कहा कि चैपल की अपनी राय थी और पांच सात साल से कप्तान रहने के कारण गांगुली की अपनी। दोनों में वैचारिक मतभेद हो गया था जो कभी भी हो सकता है। भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाना था और चैपल के साथ दो साल के प्रयोग के बाद ऐसा हुआ भी।
गावस्कर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट के बारे में बोलकर किताब बेचना अब एक शिगूफा बन गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार और भारत की आबादी और यहां क्रिकेट किस कदर लोकप्रिय है, यह देखकर ऐसा ही लगता है। ऑस्ट्रेलिया में कितनी किताबें 2000, 5000 या 10000 बिकेंगी। भारत में बिक्री दुगुनी से भी अधिक होती है। यही वजह है कि भारतीय क्रिकेटरों के बारे में बोलकर किताब बेचने का तरीका तलाश लिया है।
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