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गावस्कर की तारीफ मेरे लिए बड़ी बात : जहीर
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:05-01-13 12:47 PM
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मुंबई के ब्रैडमैन सुनील गावस्कर और एशियाई ब्रैडमैन कहे जाने वाले पाकिस्तान के जहीर अब्बास जब आमने सामने खड़े होकर एक दूसरे की तारीफ कर रहे हों तो दोनों देशों की क्रिकेट इससे बड़ा गौरवपूर्ण क्षण कोई और हो ही नहीं सकता।
 
गावस्कर और जहीर की इस अभूतपूर्व मुलाकात का मौका था शुक्रवार रात को दिए गए सीएट क्रिकेट रेटिंग अवॉर्ड्स जिसमें पाकिस्तान की रन मशीन कहे जाने वाले जहीर को सीएट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड गावस्कर ने प्रदान दिया।
 
जहीर को यह सम्मान देने के बाद गावस्कर ने कहा कि जहीर ऐसे बल्लेबाज थे जो बल्लेबाजी को आसान बना देते थे। मैं अपने करियर में दो ऐसे बल्लेबाजों को जानता हूं जो बल्लेबाजी का वाकई प्यार करते हैं एक जेड 'जहीर' और दूसरे ज्योफ्री बायकाट।
 
गावस्कर की तारीफ से अभिभूत नजर आ रहे जहीर ने भी कहा कि गावस्कर यदि स्लिप में खड़े होकर मेरे स्ट्रोक्स की तारीफ करते थे तो यह मेरे लिए बडी बात थी। वैसे मैं यह भी सोचता था कि कपिल गेंद को इतना स्विंग कैसे करा लेते हैं।
 
अवॉर्ड समारोह में भारत-पाकिस्तान विशेष पुरस्कार के तहत गावस्कर को सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज और कपिल को सर्वश्रेष्ठ टेस्ट गेंदबाज तथा इंजमाम उल हक को सर्वश्रेष्ठ वनडे बल्लेबाज और वसीम अकरम को सर्वश्रेष्ठ वनडे गेंदबाज का पुरस्कार दिया गया। पाकिस्तान के पूर्व ओपनर सईद अनवर और भारतीय ओपनर वीरेन्द्र सहवाग को सीएट ऑडियंस च्वाइस अवॉर्ड दिया गया।
 
दोनों देशों के पूर्व दिग्गजों ने एक-दूसरे के खिलाफ खेलने को लेकर अपनी भावनाओं का खुलकर इजहार किया। जहीर ने कहा कि मेरा यह सोचना नहीं होता था कि जीतना है बल्कि मेरा एक ही लक्ष्य होता था कि अच्छा खेलना है।
 
कपिल ने कहा कि मेरा पहला दौरा 1978 में पाकिस्तान का था। उस दौरे में मुझे पहली बार पता लगा था कि मैदान पर गालियां कैसे दी जाती हैं। दोनों देशों के बीच खेलने की भावना को बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। इस बात को वही समझ सकता है जो मैदान में खेला हो।
 
अकरम ने कहा कि मैं भारत के खिलाफ पहली बार 1985 में मेलबोर्न में खेला था। हम वह मैच आराम से हार गए थे लेकिन मैच से पहले रात को ठीक से नींद नहीं आई थी कि भारत से जीतना है।
 
भारत के खिलाफ 194 रन की रिकॉर्डतोड़ पारी खेलने वाले पूर्व ओपनर अनवर ने कहा कि भारत से खेलने में मुझे हमेशा बड़ा मजा था। भारत में दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में खेलने का आनंद ही अलग था। उस पारी से मैच जीतने पर वाकई खुशी हुई थी।
 
इंजमाम ने 2004-05 के बेंगलुरू टेस्ट की याद करते हुए कहा कि वह मेरा 100वां टेस्ट था। मैंने 187 रन बनाए थे और हमने वह टेस्ट जीतकर सीरीज बराबर की थी। मुझे भारत के खिलाफ वह पारी हमेशा याद रहेगी।
 
अत्यधिक दबाव में भी बेहद ठंडे अंदाज में खेलने के बारे में इंजमाम ने कहा कि बात 1992 के विश्व कप की है और कप्तान इमरान खां के कहे शब्द मुझे अपने करियर में हमेशा याद रहे। जब मैं बल्लेबाजी करने उतरा तो इमरान ने कहा था कि यह सोचकर खुद पर कभी दबाव मत लो कि दर्शक सिर्फ तुम्हें देखने आए हैं। अपना खेल खेलो। उनके यह अल्फाज मुझे हमेशा याद रहे। वैसे मैं यह नहीं कहता कि दबाव नहीं होता। दबाव होता है लेकिन आपको उससे निपटना आना चाहिए।
 
 
 
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