तेंदुलकर के संन्यास के साथ समाप्त हुआ एक युग
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:23-12-12 04:03 PM
Last Updated:24-12-12 05:39 PM
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दो दशक से भी अधिक समय तक क्रिकेट का बादशाह बने रहने के बाद सचिन तेंदुलकर ने रविवार को वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया जिससे निश्चित तौर पर दुनिया भर के गेंदबाजों ने राहत की सांस ली होगी।

ऐसा बल्लेबाज जिसमें महान सर डोनल्ड ब्रैडमैन को अपनी छवि दिखती थी और जिसने बल्लेबाजी का लगभग हर रिकॉर्ड अपने नाम किया, उनकी कमी भारतीय टीम ही नहीं क्रिकेट प्रेमियों को भी लंबे समय तक खलती रहेगी। उन्होंने अपने वनडे करियर में 463 मेच में 44.83 की औसत से 18,426 रन बनाये।

दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमी मुंबई में जन्में इस बल्लेबाज को लिटिल मास्टर और मास्टर ब्लास्टर के नाम से भी जानते रहे हैं। वह पिछले कुछ समय से खराब दौर से गुजर रहे थे जिससे उन पर संन्यास का दबाव था। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि वह समकालीन क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज थे। वह टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में सर्वाधिक रन और सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं। वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर हैं। इनमें से 51 शतक उन्होंने टेस्ट और 49 शतक वनडे में लगाये। उन्हें हमेशा ब्रैडमैन के बाद सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज आंका जाएगा। यह अलग बात है कि उनका करियर भी उतार चढ़ावों से भरा रहा।

वह कप्तान के रूप में ज्यादा सफल नहीं रहे लेकिन एक समय था जबकि उनका विकेट गिरने के बाद भारतीय पारी का अंत माना जाता था। राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण के आने के बाद उन्होंने भारतीय मध्यक्रम को मजबूती प्रदान की और इन चारों को फैब फोर कहा जाने लगा।

तेंदुलकर तब केवल 16 साल के थे जब उन्होंने 1989 में इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तानी टीम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे गेंदबाजों के सामने उन्होंने शुरू में ही दिखा दिया था कि उनमें आसमान छूने की क्षमता है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 15 नवंबर 1989 को पदार्पण करने से काफी पहले तेंदुलकर ने अपने कौशल का परिचय दे दिया था। उन्होंने 1988 में लॉर्ड हैरिस शील्ड अंतर स्कूल मैच में अपने मित्र विनोद कांबली के साथ 664 रन की अटूट साझेदारी की थी।

उन्होंने अपना पहला टेस्ट शतक इंग्लैंड के खिलाफ 1990 में ओल्ड ट्रैफर्ड में लगाया था। इसके बाद उन्होंने 1991-92 के ऑस्ट्रेलिया दौर में सिडनी और पर्थ में दो बेहतरीन शतकीय पारियां खेली थी। इसके बाद तो बल्लेबाजी का कोई भी रिकॉर्ड उनसे अछूता नहीं रहा। वह केवल ब्रायन लारा के टेस्ट क्रिकेट में नाबाद 400 रन और प्रथम श्रेणी मैचों में नाबाद 501 रन की सर्वोच्च व्यक्तिगत पारी के रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पाये।

वनडे क्रिकेट की शुरुआत 1971 में हो गयी थी लेकिन वह तेंदुलकर थे जिन्होंने इस प्रारूप में पहला दोहरा शतक जमाया थ। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फरवरी 2010 में ग्वालियर में यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके टाइम पत्रिका ने वर्ष की दस शीर्ष खेल घटनाओं में शामिल किया था।

उनका विकेट गेंदबाजों के लिये सबसे कीमती रहा और दुनिया के जिस गेंदबाज को भी उनका विकेट मिला उसने इसका जोरदार जश्न मनाया। क्रिकेट से इतर उन्हें इस साल राज्यसभा के लिये मनोनीत किया गया। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले क्रिकेटर हैं। उन्होंने भारत के खेल परिदृश्य में सुधार की इच्छा जतायी है।

वह पिछले साल इंग्लैंड दौरे में भारत की टेस्ट और वनडे में शर्मनाक हार के दौरान फॉर्म में नहीं रहे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरा भी उनके लिये दुस्वप्न की तरह रहा। तेंदुलकर पूरी तरह से टीम मैन थे। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को मौका देने के उद्देश्य से 2006 में ही टवेंटी-20 क्रिकेट खेलना बंद कर दिया था लेकिन इस बीच उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग के जरिये इस प्रारूप में अपनी क्षमता का जोरदार प्रदर्शन किया।

उनकी बल्लेबाजी की सराहना करने वालों में महान ब्रैडमैन भी शामिल थे। ब्रैडमैन ने 1999 में कहा था कि तेंदुलकर की शैली उन्हें अपनी बल्लेबाजी शैली की याद दिलाती है। इस महान ऑस्ट्रेलियाई ने कहा था कि जब मैं बल्लेबाजी करता था तो इसी तरह से महसूस करता था।

तेंदुलकर के रिकॉर्ड तक पहुंचना फिलहाल किसी के लिये संभव नहीं दिख रहा है। उनके बाद वनडे में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग शामिल हैं जिन्होंने 13,704 रन बनाये हैं। श्रीलंका के सनथ जयसूर्या 13,430 रन बनाकर तीसरे स्थान पर हैं। पोंटिंग और जयसूर्या दोनों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं।

बल्लेबाज के अलावा तेंदुलकर ने गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया। उन्होंने अपने वनडे करियर में 154 विकेट लिये हैं। वह जयसूर्या और जाक कैलिस के साथ दुनिया के उन तीन क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने वनडे में दस हजार रन, 150 से अधिक विकेट और 100 से अधिक कैच लिये हैं। तेंदुलकर के नाम पर वनडे में 140 कैच दर्ज हैं।

 
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