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भविष्य में टीम इंडिया की कोचिंग के लिए तैयार द्रविड़
मुंबई, एजेंसी
First Published:01-07-12 09:44 PM
हाल में संन्यास लेने वाले राहुल द्रविड़ ने रविवार को संकेत दिया कि भविष्य में भारतीय टीम को कोचिंग देने की पेशकश मिलने पर वह इस पर विचार कर सकते हैं। यह पूछने पर कि क्या वह भविष्य में भारतीय टीम की कोचिंग जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं, द्रविड़ ने कहा कि किसी को क्या पता कि भविष्य में ऐसा हो सकता है।
द्रविड़ किसी प्रतिबद्धता से बचे लेकिन उन्होंने इस साल आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के साथ अपनी भूमिका की ओर इशारा किया जब वह टीम के कप्तान सह मेंटर थे। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता। कई चीजों के बारे में मैंने अभी फैसला नहीं किया है। मेरे पास लेवल एक, दो और तीन का प्रमाण पत्र नहीं है जो लोग कभी-कभी मांगते हैं।
द्रविड़ ने कहा कि इस साल यह राजस्थान रॉयल्स के साथ मेरी भूमिका का हिस्सा था। यह नेतृत्व क्षमता से थोड़ा बढ़कर है। मैं इसके रणनीति और कोचिंग के हिस्से से जुड़ा था और इसका पूरा लुत्फ उठाया। खेल के भद्रजनों में शामिल रहे द्रविड़ ने खुलासा किया कि अपने 16 साल के अंतरराष्ट्रीय कैरियर के दौरान उन्होंने कुछ मौकों पर अपना संयम गंवा दिया था।
द्रविड़ ने कहा कि ड्रेसिंग रूम की निजता के दौरान मैं कभी-कभी अपनी भावनाओं को बहने देता हूं। मैं बहुत जल्द नाराज नहीं होता लेकिन कभी ऐसा समय आता है जब मैं खुद से हताश हो जाता हूं, शायद खराब शॉट खेलने के बाद, आउट होने के बाद, मैंने अपने कुछ सामान को नुकसान भी पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि 20 साल के दौरान आप कम से कम एक या दो बार तो मुझे ऐसा करने की इजाजत दोगे। कई मैच विजयी पारी खेलने वाले खिलाड़ी के लिए किसी एक अच्छी पारी को चुनना मुश्किल है लेकिन द्रविड़ ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में अपने दोहरे शतक को अपनी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि मैं पूरी पारी के दौरान जिस तरह खेला और जिस तरह मैं नियंत्रण में था, मुझे लगता है कि यह मेरी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक है। यह ध्यान में रखते हुए भी कि आस्ट्रेलिया ने 550 से अधिक रन बनाए थे लेकिन सही कहूं तो वह अच्छा बल्लेबाजी विकेट था।
एडिलेड टेस्ट में छक्का मारकर शतक पूरा करने के बारे में द्रविड़ ने कहा कि मैं कभी छक्का नहीं मारना चाहता था। बस यह हो गया। मैंने कभी इसके बारे में सोचा नहीं था, यह खुद ब खुद हो गया।
द्रविड़ ने कहा कि ड्रेसिंग रूम की निजता के दौरान मैं कभी-कभी अपनी भावनाओं को बहने देता हूं। मैं बहुत जल्द नाराज नहीं होता लेकिन कभी ऐसा समय आता है जब मैं खुद से हताश हो जाता हूं, शायद खराब शॉट खेलने के बाद, आउट होने के बाद, मैंने अपने कुछ सामान को नुकसान भी पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि 20 साल के दौरान आप कम से कम एक या दो बार तो मुझे ऐसा करने की इजाजत दोगे। कई मैच विजयी पारी खेलने वाले खिलाड़ी के लिए किसी एक अच्छी पारी को चुनना मुश्किल है लेकिन द्रविड़ ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में अपने दोहरे शतक को अपनी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि मैं पूरी पारी के दौरान जिस तरह खेला और जिस तरह मैं नियंत्रण में था, मुझे लगता है कि यह मेरी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक है। यह ध्यान में रखते हुए भी कि आस्ट्रेलिया ने 550 से अधिक रन बनाए थे लेकिन सही कहूं तो वह अच्छा बल्लेबाजी विकेट था।
एडिलेड टेस्ट में छक्का मारकर शतक पूरा करने के बारे में द्रविड़ ने कहा कि मैं कभी छक्का नहीं मारना चाहता था। बस यह हो गया। मैंने कभी इसके बारे में सोचा नहीं था, यह खुद ब खुद हो गया।
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