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सबसे बड़ा सवाल, पाकिस्तान से खेलकर हमें क्या मिला?
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:07-01-13 09:52 AM
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पाकिस्तान और भारत के बीच खेली गई पांच मैचों (दो ट्वेंटी-20 और तीन एकदिवसीय) की श्रृंखला समाप्त हो चुकी है। पाकिस्तानी टीम जहां एकदिवसीय ट्रॉफी और कुछ अच्छी यादों के साथ स्वदेश लौटी, वहीं भारतीय टीम, सरकार और बोर्ड ने आपसी सौहार्द का एक माहौल तैयार करने का श्रेय हासिल किया।

इस श्रृंखला से हर किसी को कुछ न कुछ हासिल हुआ। दर्शकों को जहां अच्छा क्रिकेट देखने को मिला, वहीं राजनीतिक स्तर पर एक दोस्ती भरा माहौल तैयार हुआ। पांच में से तीन मैचों में भारत की हार हुई, लेकिन वह हमेशा से दिलों को जोड़ने का काम करने वाला क्रिकेट जीत गया।

इस आपसी श्रृंखला के माध्यम से कई पाकिस्तानी दर्शकों और पत्रकारों को पहली बार भारत आने और इस देश के बारे में जानने का कभी न भुला पाने वाला मौका मिला। इस दौरान पाकिस्तानी दर्शकों और पहली दफा अपने देश से बाहर निकले पत्रकारों और अवाम ने जाना कि भारतीय उनके बारे में क्या सोच रखते हैं।

कई पत्रकारों और दर्शकों को चेन्नई और कोलकाता के लिए वीजा नहीं मिला। इसके कई कारण थे। इन कारणों में एक यह भी था (जो पाकिस्तानी लोगों को अच्छी तरह पता है) कि पिछली बार हुई श्रृंखला के दौरान भारत आने वाले कई पाकिस्तानी स्वदेश लौटे ही नहीं।

इस कारण वीजा नियमों को लेकर कड़ाई का किसी स्तर पर विरोध नहीं हुआ। इसके बारे में चर्चा तो हुई लेकिन ज्यादा कुछ लिखा या कहा नहीं गया। यही कारण है कि पाकिस्तानी पत्रकारों और दर्शकों को दिल्ली में हुए मुकाबले के लिए पहाड़गंज में होटल तलाशने में दिक्कत हुई, जहां दूसरे देशों के लोगों को आसानी से होटल मिल जाते हैं।

यह बात स्वीकार की गई कि इसमें होटल मालिकों की गलती नहीं है। यह उन्हीं का कहना था कि यह उस देश के प्रति सख्ती है, जिसके साथ खेल और राजनीतिक रिश्ते जारी रखने को लेकर भारतीयों में आम सहमति कभी नहीं बन सकती। इसके कूटनीतिक कारण भी हैं।

खेल की बात करें तो इस श्रृंखला से भारत को शमी अहमद और भुवनेश्वर कुमार जैसे भविष्य के गेंदबाज मिले लेकिन वीरेंद्र सहवाग का आत्मविश्वास इस श्रृंखला में हिल गया। इसी कारण वह इंग्लैंड के साथ होने वाली श्रृंखला के तीन मैचों से बाहर हैं।

इस श्रृंखला ने भारतीय बल्लेबाजों की पोल खोली और गेंदबाजों को नया जीवन दिया। इस श्रृंखला ने धौनी को खराब बल्लेबाजी को आलोचनाओं से बाहर निकाला और भारत के लिए सबसे अधिक कैच-200 (बतौर विकेटकीपर) लेने वाला खिलाड़ी बनाया।

इस श्रृंखला से अगर पाकिस्तान को मोहम्मद इरफान जैसा गेंदबाज मिला, तो नासिर जमशेद जैसा भविष्य का बल्लेबाज भी मिला। यह श्रृंखला यह भी साबित कर गई कि अब भारत-पाकिस्तान मुकाबलों में वह 'गरमी' नहीं देखने को मिलती, जिसकी वजह से इसका रोमांच बना होता था।

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने स्वीकार किया कि अब भारत और पाकिस्तान की टीमें आपसी सौहार्द का सम्मान करते हुए खेलती हैं और उनके बीच इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़कर खेल भावना चरम पर होता है।

यह श्रृंखला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए एक उम्मीद की लकीर छोड़ गई, जिस पर चलते हुए वह भारत को अपने घरेलू मैचों के लिए मेजबान बनाने की बात सोच सकता है। साथ ही साथ भारत और पाकिस्तान के बीच सालाना या द्वीवार्षिक श्रृंखला की सम्भावना को भी बल मिला।

मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद शिवसेना ने पाकिस्तान के साथ किसी स्तर पर खेल सम्बंधों की बहाली का विरोध किया था। शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे के इंतकाल के बाद इस राजनीतिक पार्टी ने किसी तरह का विरोध नहीं किया। इस कारण यह श्रृंखला शिवसेना की राजनीतिक सोच में सम्भावित बदलाव के संकेत की गवाह बनी।

इस श्रृंखला ने 23 साल से भारतीय क्रिकेट की रीढ रहे सचिन तेंदुलकर के बिना भारतीय टीम को आगे बढ़ने की हिम्मत और सीख दी। बीते 20 साल में ऐसा पहली बार हुआ, जब सचिन फिट रहते हुए मैदान में उतरे, लेकिन भारत के लिए नहीं बल्कि अपने घरेलू टीम मुम्बई के लिए खेले।

सौरव गांगुली, अनिल कुम्बले, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण की विदाई के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के परिवर्तन काल से गुजरने की बातें उतनी असरकारी नहीं लगती थीं, जितनी कि सचिन की विदाई के बाद लगने लगीं। सचिन का टीम में न होना एक तरह का खालीपन दे गया लेकिन इस श्रृंखला के माध्यम से भारतीय टीम ने उसे भरने की असम्भव सी कोशिश का आगाज किया।

 
 
 
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