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चार्जर्स के सामने दबंग बनने उतरेंगे डेयरडेविल्स
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:18-04-12 02:43 PM
दिल्ली डेयरडेविल्स के जाबांज अपने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला बरकरार रखते हुए यहां फिरोजशाह कोटला मैदान में गुरूवार को डेक्कन चार्जर्स हैदराबाद के खिलाफ आईपीएल मैच में अपनी दबंगई फिर से साबित करने उतरेंगे।
दिल्ली ने अपने घरेलू कोटला मैदान में पिछले मुकाबले में गत चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स को 40 गेंदें शेष रहते आठ विकेट से करारी मात दी थी। डेयरडेविल्स का कोटला में लगातार दूसरी जीत हासिल करने का लक्ष्य रहेगा। डेयरडेविल्स के सामने इस मुकाबले में वह टीम है जो अब तक अपने तीनों मैच हार चुकी है।
चार्जर्स के सामने गुरुवार को जयपुर में जीत हासिल करने का सुनहरा मौका था लेकिन खराब फील्डिंग ने उनके हाथों से यह मौका छीन लिया। चार्जर्स दो विकेट पर 196 का मजबूत स्कोर बनाने के बावजूद राजस्थान रॉयल्स को जीत थमा बैठे। चार्जर्स की स्थिति इस समय घायल शेर जैसी है जो कुछ पाने के लिए छटपटा रहा है।
डेयरडेविल्स के कप्तान वीरेंद्र सहवाग को चार्जर्स के पलटवार से सावधान रहने की जरूरत है। डेयरडेविल्स के पास इस समय सबसे बड़ा मजबूत पक्ष उसके चार धुरंधर विदेशी खिलाड़ी हैं। जिससे दिल्ली की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही खतरनाक हो जाती हैं।
दिल्ली अपने चार मैचों में से तीन में जीत हासिल कर चुकी है। उसने कोलकाता नाइट राइडर्स को आठ विकेट से, चेन्नई सुपर किंग्स को आठ विकेट से और मुंबई इंडियन्स को सात विकेट से पराजित किया था।
विस्फोटक ओपनर सहवाग के साथ इंग्लैंड के केविन पीटरसन और श्रीलंका के माहेला जयवर्धने जैसे दो धुरंधर बल्लेबाज तो पहले ही थे और अब इनमें न्यूजीलैंड के आक्रामक बल्लेबाज रॉस टेलर भी जुड़ गए हैं। यानि चार बल्लेबाज दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण का मर्डर कर सकते हैं।
दिल्ली के पास मोर्न मोर्कल के रूप में दक्षिण अफ्रीका का वह बेहतरीन गेंदबाज है जिसने अपनी तेजी और उछाल से सभी बल्लेबाजों को दहलाया है। मोर्कल को गेंदबाजी में उमेश यादव अजित आगरकर और इरफान पठान से शानदार सहयोग मिल रहा है। लेफ्ट आर्म स्पिनर शाहबाज नदीम से पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ गेंदबाजी की शुरूआत कराने का सहवाग का निर्णय जैक पॉट साबित हुआ था।
दिल्ली का गेंदबाजी आक्रमण टीम की बल्लेबाजी की तरह ही संतुलित है। पीटरसन, माहेला और टेलर के आने से सहवाग के ऊपर से बल्लेबाजी का बोझ भी कम हुआ है और वह खुलकर अपने शॉट खेलने लगे हैं। कोटला में चेन्नई के खिलाफ जो पिछला मैच खेला गया था उसमें दिल्ली के गेंदबाजों ने चेन्नई को आइ विकेट के 110 रन के मामूली स्कोर पर रोक दिया था। कोटला की पिच को देखते हुए एक बार फिर यह उम्मीद है कि यहां गेंदबालों को दबदबा सिर चढ़कर बोलेगा। दूसरी ओर डेक्कन चार्जर्स ने चेन्नई, मुंबई और राजस्थान से अपने तीनों मैच गंवाए हैं। चार्जस के कप्तान श्रीलंका के कुमार संगकारा राजस्थान के खिलाफ बुधवार के मैच के प्रदर्शन से यह विश्वास मिल सकता है कि उनकी टीम में पूरी क्षमता के साथ खेले तो वह किसी को भी निपटा सकती है।
चार्जर्स ने यदि थोड़ा भी अच्छा क्षेत्ररक्षण किया होता और कैंच लपके होते तो पहली जीत उसके नाम चढ़ चुकी होती। लेकिन 196 रन का मजबूत स्कोर बनाने का आत्मविश्वास चार्जर्स की उम्मीदों को फ्यूज कर गया। राजस्थान के चोटी के चारों बल्लेबाजों संगकारा, शिखर धवन, जे पी डुमिनि और डेनियल क्रिस्टियन ने मजबूत स्कोर बनाए थे। चार्जर्स की बल्लेबाजी तो ठीक थी लेकिन उसके गेंदबाजों ने निर्णायक क्षणों में अपनी टीम को निराश किया था। खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज डेल स्टेन को टेस्ट मैचों जैसी सटीकता ट्वेंटी 20 में भी दिखानी होगी।
बुधवार को उनके एक ओवर में पड़े लगातार चार चौकों में चार्जर्स के हाथों में जीत का मौका छीन लिया था। चार्जर्स को यदि हार का चौका खाने से बचना है तो उसके खिलाड़ियों को अपनी उर्जा शत प्रतिशत चार्ज कर मैदान में उतरना होगा।
दिल्ली ने अपने घरेलू कोटला मैदान में पिछले मुकाबले में गत चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स को 40 गेंदें शेष रहते आठ विकेट से करारी मात दी थी। डेयरडेविल्स का कोटला में लगातार दूसरी जीत हासिल करने का लक्ष्य रहेगा। डेयरडेविल्स के सामने इस मुकाबले में वह टीम है जो अब तक अपने तीनों मैच हार चुकी है।
चार्जर्स के सामने गुरुवार को जयपुर में जीत हासिल करने का सुनहरा मौका था लेकिन खराब फील्डिंग ने उनके हाथों से यह मौका छीन लिया। चार्जर्स दो विकेट पर 196 का मजबूत स्कोर बनाने के बावजूद राजस्थान रॉयल्स को जीत थमा बैठे। चार्जर्स की स्थिति इस समय घायल शेर जैसी है जो कुछ पाने के लिए छटपटा रहा है।
डेयरडेविल्स के कप्तान वीरेंद्र सहवाग को चार्जर्स के पलटवार से सावधान रहने की जरूरत है। डेयरडेविल्स के पास इस समय सबसे बड़ा मजबूत पक्ष उसके चार धुरंधर विदेशी खिलाड़ी हैं। जिससे दिल्ली की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही खतरनाक हो जाती हैं।
दिल्ली अपने चार मैचों में से तीन में जीत हासिल कर चुकी है। उसने कोलकाता नाइट राइडर्स को आठ विकेट से, चेन्नई सुपर किंग्स को आठ विकेट से और मुंबई इंडियन्स को सात विकेट से पराजित किया था।
दिल्ली के पास मोर्न मोर्कल के रूप में दक्षिण अफ्रीका का वह बेहतरीन गेंदबाज है जिसने अपनी तेजी और उछाल से सभी बल्लेबाजों को दहलाया है। मोर्कल को गेंदबाजी में उमेश यादव अजित आगरकर और इरफान पठान से शानदार सहयोग मिल रहा है। लेफ्ट आर्म स्पिनर शाहबाज नदीम से पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ गेंदबाजी की शुरूआत कराने का सहवाग का निर्णय जैक पॉट साबित हुआ था।
दिल्ली का गेंदबाजी आक्रमण टीम की बल्लेबाजी की तरह ही संतुलित है। पीटरसन, माहेला और टेलर के आने से सहवाग के ऊपर से बल्लेबाजी का बोझ भी कम हुआ है और वह खुलकर अपने शॉट खेलने लगे हैं। कोटला में चेन्नई के खिलाफ जो पिछला मैच खेला गया था उसमें दिल्ली के गेंदबाजों ने चेन्नई को आइ विकेट के 110 रन के मामूली स्कोर पर रोक दिया था। कोटला की पिच को देखते हुए एक बार फिर यह उम्मीद है कि यहां गेंदबालों को दबदबा सिर चढ़कर बोलेगा। दूसरी ओर डेक्कन चार्जर्स ने चेन्नई, मुंबई और राजस्थान से अपने तीनों मैच गंवाए हैं। चार्जस के कप्तान श्रीलंका के कुमार संगकारा राजस्थान के खिलाफ बुधवार के मैच के प्रदर्शन से यह विश्वास मिल सकता है कि उनकी टीम में पूरी क्षमता के साथ खेले तो वह किसी को भी निपटा सकती है।
चार्जर्स ने यदि थोड़ा भी अच्छा क्षेत्ररक्षण किया होता और कैंच लपके होते तो पहली जीत उसके नाम चढ़ चुकी होती। लेकिन 196 रन का मजबूत स्कोर बनाने का आत्मविश्वास चार्जर्स की उम्मीदों को फ्यूज कर गया। राजस्थान के चोटी के चारों बल्लेबाजों संगकारा, शिखर धवन, जे पी डुमिनि और डेनियल क्रिस्टियन ने मजबूत स्कोर बनाए थे। चार्जर्स की बल्लेबाजी तो ठीक थी लेकिन उसके गेंदबाजों ने निर्णायक क्षणों में अपनी टीम को निराश किया था। खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज डेल स्टेन को टेस्ट मैचों जैसी सटीकता ट्वेंटी 20 में भी दिखानी होगी।
बुधवार को उनके एक ओवर में पड़े लगातार चार चौकों में चार्जर्स के हाथों में जीत का मौका छीन लिया था। चार्जर्स को यदि हार का चौका खाने से बचना है तो उसके खिलाड़ियों को अपनी उर्जा शत प्रतिशत चार्ज कर मैदान में उतरना होगा।
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