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कोटला में पहले दिन चंद्रपाल चमके
नयी दिल्ली, एजेंसी
First Published:06-11-11 09:43 AM
Last Updated:06-11-11 04:57 PM
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अनुभवी बल्लेबाज शिवनारायण चंद्रपाल ने भारतीय गेंदबाजों को परेशान करने की अपनी बहुचर्चित आदत का रविवार को फिरोजशाह कोटला पर जबर्दस्त मुजाहिरा करके नाबाद शतक जमाया जिससे वेस्टइंडीज पहले टेस्ट मैच में शुरुआती झटकों से उबरकर अच्छे स्कोर की तरफ बढ़ने में सफल रहा।

दर्शक सचिन तेंदुलकर का बहुप्रतीक्षित 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक देखने आए थे लेकिन कोटला में पहला दिन चंद्रपाल के नाम रहा। उन्होंने तब क्रीज पर कदम रखा जब वेस्टइंडीज 72 रन पर तीन विकेट गंवाकर संघर्ष कर रहा था। चंद्रपाल ने नाबाद 111 रन बनाए और इस बीच किशोर सलामी बल्लेबाज क्रेग बेथवेट (63) के साथ चौथे विकेट के लिए 108 रन की साझेदारी भी की। उनके इस बेजोड़ प्रदर्शन से वेस्टइंडीज ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक पांच विकेट पर 256 रन बनाए।
 
बाएं हाथ के बल्लेबाज चंद्रपाल ने अपनी पारी में 167 गेंद खेली हैं तथा सात चौके और दो छक्के लगाए हैं। इस बीच उन्होंने भारत के खिलाफ सातवां और कुल 24वां शतक पूरा किया। उनके साथ दूसरे छोर पर विकेटकीपर बल्लेबाज कार्लटन बॉ 19 रन पर खेल रहे हैं। ये दोनों अब तक 56 रन की साझेदारी कर चुके हैं।

भारतीय गेंदबाजों में केवल स्पिनर ही प्रभावित कर पाए लेकिन चंद्रपाल के सामने वे भी बेअसर रहे। बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने अब तक 29 ओवर में 58 रन देकर तीन जबकि अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने 79 रन देकर दो विकेट लिए हैं।

ओझा ने कीरेन पावेल (14) और किर्क एडवडर्स (15) को पहले सत्र में ही पवेलियन भेज दिया था लेकिन दूसरे सत्र में भारत को केवल एक विकेट मिला। अपना पहला मैच खेल रहे रविचंद्रन अश्विन ने लंच के बाद पहले ओवर में ही डेरेन ब्रावो (12) के रूप में अपना पहला विकेट लिया।

स्पिनरों ने तीसरा सत्र फिर से भारत के नाम करने की कोशिश की। ओझा ने इस सत्र के छठे ओवर में ही ब्रेथवेट की एकाग्रता भंग की जबकि अश्विन ने मलरेन सैमुअल्स (15) को अधिक देर तक नहीं टिकने दिया। चंद्रपाल हमेशा भारत के खिलाफ सफल रहे हैं और आज भी कोई अतिशयोक्ति नहीं रही। कोटला पर रन बनाना मुश्किल नहीं था और बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने ढीली गेंदों का इंतजार करके सहजता से रन बटोरे। इस बीच उन्होंने अश्विन और ओझा की गेंदों को छह रन के लिए भी भेजा।

ब्रेथवेट ने हाल में कहा था वह विकेट पर टिकना और गेंद छोड़ने की कला सीख रहे हैं तथा यहां पहले दो सत्र में उन्होंने अपनी इस प्रतिबद्धता का अच्छा नमूना पेश किया। उन्होंने अपनी पारी में 212 गेंद खेली जब तब एक छोर संभाले रखा जबकि टीम को इसकी जरूरत थी।

पिच के मिजाज को देखते हुए सुबह कैरेबियाई कप्तान डेरेन सैमी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पावेल ने इशांत शर्मा के पहले ओवर में ही दो चौके जड़कर सकारात्मक शुरुआत की। इशांत के साथ उमेश यादव ने नई गेंद संभाली जो टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले विदर्भ के पहले खिलाड़ी भी बने। यादव का पहला स्पैल हालांकि प्रभावशाली नहीं रहा और उन्हें लाइन पकड़ने में परेशानी हुई।

धौनी ने दसवें ओवर में ही बाएं हाथ के स्पिनर ओझा को गेंद सौंप दी। जिनके शुरुआती दो ओवर घटनाप्रधान रहे। पावेल ने उनके पहले ओवर की आखिरी गेंद पर वापस कैच उछाला लेकिन ओझा उसे लपक नहीं पाए। ओझा ने अपनी यह गलती टीम को महंगी नहीं पड़ने दी। उनके अगले ओवर की अंतिम गेंद हल्का टर्न लेकर पावेल के पैड से टकराई और कुमार धर्मसेना ने कुछ देर विचार करने के बाद उंगली उठा दी। स्टेडियम में मौजूद लगभग आठ हजार दर्शकों ने तहेदिल से इस विकेट का स्वागत किया।

 
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