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गेंदबाजों ने भारत को क्लीनस्वीप से बचाया
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:06-01-2013 12:10:54 PMLast Updated:06-01-2013 10:17:26 PM
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बल्लेबाजों के लगातार तीसरे मैच में फ्लाप शो के बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने प्रतिष्ठा से जुड़े तीसरे और आखिरी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में छोटे स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव करके भारत को दस रन की रोमांचक जीत दिलाई और पाकिस्तान की क्लीनस्वीप की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी भारतीय टीम जब 43.4 ओवर में 167 रन पर आउट हो गई तो दर्शकों का जोश ठंडा पड़ गया। लेकिन गेंदबाजों ने जबर्दस्त जज्बे और अनुशासन का प्रदर्शन करके पाकिस्तान को 48.5 ओवर में 157 रन पर ढेर हो गई। चेन्नई में छह विकेट और कोलकाता में 85 रन से जीत दर्ज करने वाले पाकिस्तान ने इस तरह से तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीती।

भारतीय बल्लेबाज नहीं चल पाए लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के 36, सुरेश रैना के 31 और रविंदर जडेजा के 27 रन आखिर में कीमती साबित हुए। सईद अजमल का करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (24 रन देकर पांच विकेट) बेकार चला गया।

भुवनेश्वर कुमार (31 रन देकर दो विकेट) ने भारतीयों की उम्मीद जगायी जिसे इशांत शर्मा (36 रन देकर तीन विकेट) और रविचंद्रन अश्विन (47 रन देकर दो विकेट) ने पंख लगाए। शमी अहमद और जडेजा ने भी महत्वपूर्ण मौकों पर एक एक विकेट लिए और भारत फिरोजशाह कोटला पर पहली बार पाकिस्तान को हराने में सफल रहा। पाकिस्तान की तरफ से कप्तान मिसबाह उल हक ने 39 और पिछले दो मैचों में शतक जड़ने वाले नासिर जमशेद ने 34 रन बनाए।
 
भुवनेश्वर ने भारत को मनमाफिक शुरुआत दिलाई। उत्तर प्रदेश के इस युवा गेंदबाज ने कामरान अकमल (0) और यूनिस खान (6) को अंदर आती गेंदों पर आउट करके पाकिस्तान का स्कोर दो विकेट पर 14 कर दिया। अपना पहला टेस्ट मैच खेल रही शमी ने भी शुरू से सही लाइन पकड़ी और बल्लेबाजों को खासा परेशान किया।

पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने इसके बाद जोखिम नहीं उठाया। धौनी ने भुवनेश्वर से लगातार दस ओवर करवाए और 21वें ओवर में अश्विन को गेंद सौंपी। इस ऑफ स्पिनर ने जमशेद को एलबीडब्ल्यू आउट करके भारतीयों की उम्मीद जगा दी। बिली बोडेन का फैसला हालांकि संदेहास्पद था क्योंकि लग रहा था कि गेंद तब ग्लब्स को चूमकर पैड पर लगी थी।

मिसबाह ने हमेशा की तरह पिच पर पांव जमाने में समय लगाया। पाकिस्तान ने तेजी से रन नहीं बनाये लेकिन भारत भी इस बीच विकेट नहीं ले पाए जिससे दर्शक हताश हो गये। अश्विन ने ऐसे में मिसबाह की धीमी और उदास पारी का अंत कर दिया जबकि इशांत शर्मा ने नए बल्लेबाज शोएब मलिक को एलबीडब्ल्यू आउट करके घर का रुख कर रहे दर्शकों को फिर से सीट थामने के लिए मजबूर किया।
कोटला पर फिर से समां बंधने लगा था। कड़कड़ाती ठंड में दर्शकों का जोश जागने लगा था। उमर अकमल (25) ऐसे में रविंदर जडेजा की गेंद खेलने के लिए आगे बढ़ गए। उनके चूकते ही धौनी ने बाकी काम पूरा किया और कोटला में शोर का डेसीबल में तुंरत ही इजाफा हो गया। 

इससे पहले भारतीय बल्लेबाजों का फ्लॉप शो रविवार को फिरोजशाह कोटला मैदान पर भी बदस्तूर जारी रहा जहां प्रतिष्ठा से जुड़े तीसरे और आखिरी वनडे क्रिकेट मैच में पाकिस्तान के तेज और स्पिन मिश्रित आक्रमण के सामने पूरी टीम 43.4 ओवर में 167 रन पर ढेर हो गयी।

भारत का शीर्ष क्रम फिर से नहीं चल पाया और उसका स्कोर चार विकेट पर 63 रन हो गया। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने फिर से टीम का बोझ उठाने की कोशिश लेकिन इस बार वह भी 36 रन बनाकर आउट हो गये। उन्होंने इस बीच सुरेश रैना (31) के साथ पांचवें विकेट के लिये 48 रन की साझेदारी की। पाकिस्तान की तरफ से ऑफ स्पिनर सईद अजमल ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 24 रन देकर पांच विकेट लिये।

भारत यदि स्कोर का बचाव करने में नाकाम रहता है तो यह 29 साल बाद पहला अवसर होगा जबकि भारत ने अपनी सरजमीं पर वनडे सीरीज़ के सभी मैच गंवाये। इससे पहले 1983 में वेस्टइंडीज ने 5-0 से क्लीन स्वीप किया था।

धौनी ने शीर्ष क्रम के तीन बल्लेबाजों में से किसी एक से मध्यक्रम का साथ निभाने की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने बड़े स्कोर की उम्मीद में पहले बल्लेबाजी का फैसला किया लेकिन मोहम्मद इरफान और जुनैद खान की तेज और स्विंग लेती गेंदों के सामने फिर से भारत का शीर्ष क्रम नहीं चल पाया। पाकिस्तान के दोनों तेज गेंदबाजों को शुरू में पिच से मदद मिल रही थी और इसलिए कप्तान मिसबाह उल हक ने 14 ओवर तक गेंदबाजी में कोई बदलाव नहीं किया।

वीरेंद्र सहवाग को लगातार लचर प्रदर्शन के कारण बाहर किया गया लेकिन उनकी जगह टीम में लिये गये अजिंक्य रहाणे (4) फिर से मौके का फायदा उठाने में नाकाम रहे और इरफान की गेंद पर ड्राइव करने की कोशिश में विकेटकीपर कामरान अकमल को कैच दे बैठे। 

अब दिल्ली के दो खिलाड़ी गौतम गंभीर और विराट कोहली क्रीज पर थे। दर्शकों में जोश था लेकिन जल्द ही उनका उत्साह ठंडा पड़ गया। गंभीर (15) ने इरफान की उठती गेंद पर कट करने के प्रयास में प्वाइंट पर कैच थमाकर अपना विकेट इनाम में दिया जबकि कोहली (7) ने जुनैद की गेंद को शरीर का इस्तेमाल किये बिना रक्षात्मक खेलना चाहा लेकिन वह उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर स्लिप में यूनिस खान के सुरक्षित हाथों में चली गयी।

दिल्ली के इन दोनों बल्लेबाजों के लिये यह सीरीज़ बहुत खराब रही। गंभीर ने तीन मैच में 34 रन बना पाये तो पिछले साल भारत की तरफ से हर प्रारूप में सर्वाधिक रन बनाने वाले कोहली के नाम पर केवल 13 रन दर्ज रहे। यह कोहली के करियर में पहला अवसर है जबकि वह लगातार तीन पारियों में दोहरे अंक में भी नहीं पहुंच पाये।

युवराज ने इरफान की गेंदों पर प्वाइंट और स्क्वायर लेग पर चौके जड़कर शुरुआत की। उन्होंने पहले बदलाव के रूप में आये उमर गुल का स्वागत भी दो चौकों से किया। गुल के इस ओवर में 18 रन बने जिसमें रैना का फ्री हिट पर जमाया गया चौका भी शामिल है। लेकिन दर्शक अभी खुशी से झूम पाते कि मोहम्मद हफीज की तेजी से टर्न लेती गेंद युवराज को अचंभित करके उनका ऑफ स्टंप हिला गयी। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने 23 गेंद पर इतने ही रन बनाये।

भारतीय दर्शकों की खुशी हालांकि किसी भी समय बहुत अधिक देर तक नहीं टिकी। रैना ने हफीज की गेंद पर लॉन्ग ऑन पर छह रन के लिये भेजी और फिर धौनी ने इसी गेंदबाज पर लगातार दो छक्के लगाये लेकिन ऑफ स्पिनर अजमल ने रैना और नये बल्लेबाज आर अश्विन को लगातार गेंदों पर एलबीडब्ल्यू करके भारत को फिर भंवर में फंसा दिया।

धौनी के हफीज पर लगाये गये पहले छक्के से भारत ने 27.4 ओवर में 100 रन पूरे किये। धौनी ने लगातार दो विकेट गिरने के बावजूद हफीज के अगले ओवर में फिर से मिडविकेट पर छक्का लगाया। भारतीय कप्तान जब 29 रन पर थे तब उन्हें जीवनदान मिला लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाये। गुल की गेंद पर हवा में कट करने के प्रयास में उन्होंने प्वाइंट पर कैच थमा दिया।

अपनी 55 गेंद की पारी में एक चौका और तीन छक्के लगाने वाले धौनी पाकिस्तान के खिलाफ मोहाली में ,खेले गये विश्व कप सेमीफाइनल के बाद पहली बार भारतीय सरजमीं पर वनडे में आउट हुए। इसके बाद रविंदर जडेजा (27) के गुल और अजमल पर जमाये गये छक्के भारतीयों में कुछ खुशी भर पाये।

 
 
 
 
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