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भारत के लिए भाग्यशाली रहे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का टेस्ट मैचों में जीत पर जीत दर्ज करने का अभियान मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के हाथों पारी और छह रन के साथ ही थम गया जो उनकी अगुवाई में भारतीय टीम की पहली हार है।
धोनी की कप्तानी में भारत ने इससे पहले 11 मैच खेले थे जिसमें से उसने आठ में जीत दर्ज की थी लेकिन 12वें मैच में उन्हें आखिर में हार का स्वाद का चखना ही पड़ा। इस करिश्माई क्रिकेटर की अगुवाई में भारत ने पहला मैच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही 2008 में कानपुर में खेला था। तब अनिल कुंबले की अनुपस्थिति में धोनी ने कमान संभाली थी और टीम को आठ विकेट से जीत दिलाकर सीरीज 1-1 से बराबर करवायी थी। इसके बाद उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने अगले तीन टेस्ट मैच भी जीते जिनमें आस्ट्रेलिया के खिलाफ 2008 में मोहाली और नागपुर तथा इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट मैच शामिल है।
भारत ने धोनी की कप्तानी में ही पिछले साल हैमिल्टन में न्यूजीलैंड को दस विकेट से हराकर सीरीज अपने नाम की थी। इसके बाद भारतीय टीम श्रीलंका को कानपुर और मुंबई दोनों टेस्ट मैच में पारी के अंतर से मात देकर आईसीसी रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंची थी।
धोनी की कप्तानी में ही भारत ने बांग्लादेश को हाल में दो टेस्ट मैचों की सीरीज में हराया और इस तरह से वह कप्तान के रूप में पहले दस टेस्ट मैच में हार नहीं झेलने वाले कप्तानों की सूची में शामिल हो गए। विव रिचडर्स की कप्तानी में वेस्टइंडीज ने पहले दस मैचों में हार नहीं झेली थी लेकिन इस बीच उसे केवल पांच मैच में जीत मिली थी।
दुनिया के सबसे सफल कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी कप्तान के तौर पर पहले दस मैच में आठ जीते थे लेकिन इस बीच उन्होंने एक मैच गंवाया भी था। पोंटिंग के पूर्ववर्ती स्टीव वॉ की अगुवाई में आस्ट्रेलिया ने पहले दस मैच में से पांच में जीत दर्ज की लेकिन तीन में उसे हार मिली।
वेस्टइंडीज के क्लाइव लायड भी दुनिया के सफल कप्तान रहे हैं लेकिन उन्हें भी पहले दस टेस्ट मैच में से चार में जीत और इतने ही मैचों हार मिली जबकि दक्षिण अफ्रीकी ग्रीम स्मिथ ने कप्तान के तौर पर शुरुआती दस मैचों में से पांच में जीत दर्ज की लेकिन तीन में उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। माइक ब्रेयरली, ग्रेग चैपल, सौरव गांगुली, नासिर हुसैन, हैंन्सी क्रोन्ये आदि को शुरू में अच्छी सफलताएं मिली लेकिन उनका विजय अभियान धोनी जैसा लंबा नहीं रहा।
धोनी इस मैच में असफल रहे और भारत यह मैच हार गया। इससे पहले कप्तान के रूप में उन्होंने हमेशा अच्छा खेल दिखाया। उनके नाम पर कप्तान के रूप में 12 मैच में 62.42 की औसत से 874 रन इस बात का सबूत हैं कि टीम की अगुवाई करते हुए वह कितनी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हैं। इनमें दो शतक और आठ अर्धशतक भी शामिल हैं लेकिन नागपुर में उन्होंने छह और 25 रन ही बनाए और इनके लिए भी उन्हें जूझना पड़ा।

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