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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नंबर एक के ताज के संघर्ष में पहला मुकाबला पारी से हारने वाले भारत की संतरों की नगरी नागपुर से एक और कड़वी याद जुड़ गई क्योंकि यही वह शहर है जहां उसे रनों के लिहाज से अब तक की सबसे बड़ी हार का भी सामना करना पड़ा था।
भारत ने दुनिया की नंबर एक टीम के तौर पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में कदम रखा लेकिन गेंदबाजों की शुरुआती सफलता का फायदा नहीं उठा पाने तथा राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों की अनुपस्थिति में बल्लेबाजों की नाकामी के कारण उसे पारी और छह रन से करारी हार का सामना करना पड़ा।
भारतीय टीम की वैसे यह संतरों की नगरी में तीसरी हार है लेकिन उसे यहां जो भी पराजय मिली वह भारतीयों का स्वाद कसैला करने वाली रही। इससे पहले उसे नागपुर में ही आस्ट्रेलिया के हाथों 2004 में 342 रन से हार का सामना करना पड़ा जो आज भी रनों के लिहाज से उसकी सबसे बड़ी हार है। भारत को यह हार तब मिली जबकि वह नंबर एक की कुर्सी पर अपनी स्थिति मजबूत करने और विशेष रूप से एक अप्रैल तक इस स्थान पर बने रहने की कवायद में लगा था। जो भी टीम एक अप्रैल को नंबर एक रहेगी उसे आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा और एक लाख 75 हजार डालर मिलेंगे।
महेंद्र सिंह धोनी की टीम को अब 14 फरवरी से कोलकाता में होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर दक्षिण अफ्रीका के 120 से बढ़कर 123 रेटिंग अंक हो जाएंगे जबकि भारत 125 से 122 रेटिंग अंक पर खिसक जाएगा।
भारत ने नागपुर में पहली हार 1969 में न्यूजीलैंड के हाथों झेली थी जिसने तब 169 रन से जीत दर्ज की थी।आस्ट्रेलिया के खिलाफ 2004 में मिली हार आज की पराजय की तरह बेहद कसैली थी क्योंकि उस समय भी भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी। इस मैच में तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के नहीं खेलने से काफी विवाद भी खड़ा हुआ था।
आस्ट्रेलिया ने यह मैच 342 रन के विशाल अंतर से जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम की थी जबकि भारतीय टीम तब सीरीज बराबर करने की उम्मीद लेकर यहां पहुंची थी। वैसे, यदि पारी के अंतर से हार की बात की जाए तो भारतीय टीम कुल मिलाकर 36वीं बार और अपनी सरजमीं पर 15वीं बार पारी के अंतर से पराजित हुई। दक्षिण अफ्रीका ने उसे तीसरी बार पारी से हराया और संयोग से तीनों बार उसने भारतीय सरजमीं पर ही यह मुकाम हासिल किया।
दक्षिण अफ्रीका ने 2000 में भारत को पारी और 71 रन से जबकि 2008 में अहमदाबाद में पारी और 90 रन से हराया था। पिछले दस साल में यह छठा अवसर है जबकि भारत को पारी के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा। इससे पहले वह जुलाई 2008 में श्रीलंका से कोलंबो में पारी और 239 रन से हार गया था। पारी के अंतर से भारत को सबसे करारी हार वेस्टइंडीज ने 1958 में दी थी। तब गैरी अलेक्जेंडर की अगुवाई वाली कैरेबियाई टीम पारी और 336 रन से जीती थी। वैसे यह पहला अवसर नहीं है जबकि भारत पारी की हार टालने के करीब पहुंचकर भी विरोधी टीम को दूसरी बार बल्लेबाजी के लिए नहीं बुला पाया था। इससे पहले दो अवसरों पर भारत पारी और चार रन जबकि एक बार पारी और पांच रन से हारा था।

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