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अमला ने खुद को भारतीय मूल के उन बल्लेबाजों की सूची में शामिल कर दिया जिनका बल्ला भारत के खिलाफ खूब चमका है।
रोहन कन्हाई हों या एल्विन कालीचरण या फिर नासिर हुसैन और अब हाशिम अमला भारतीय मूल के लगभग सभी क्रिकेटरों को अपने करियर में हमेशा भारतीय आक्रमण रास आया और उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भारत के खिलाफ किया।
अमला ने भारत के खिलाफ नागपुर में चल रहे पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में नाबाद 253 रन की पारी खेलकर दक्षिण अफ्रीका को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इससे पहले भी भारतीय आक्रमण की धज्जियां उड़ाने वाले गुजराती मूल के इस बल्लेबाज का यह पहला दोहरा शतक है। इसके साथ ही अमला ने खुद को भारतीय मूल के उन बल्लेबाजों की सूची में शामिल कर दिया जिनका बल्ला भारत के खिलाफ खूब चमका है। दिलचस्प संयोग यह है कि इनमें से अधिकतर ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भारतीय आक्रमण को कुंद किया।
अमला का भारत के खिलाफ यह आठवां टेस्ट मैच था जिसकी 14 पारियों में उन्होंने 52.07 की औसत से 677 रन बनाए हैं। वह 2008 में भी भारतीय दौरे पर आए थे और तब उन्होंने चेन्नई में 159 रन की पारी खेली थी। भारतीय सरजमीं पर अभी तक उन्होंने पांच मैच में 83.71 की औसत से 586 रन बनाए हैं जबकि उनका ओवरऑल औसत 44.47 है।
रोहन कन्हाई
अगर शुरूआत वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज कन्हाई से करें तो वह भारतीय गेंदबाजी पर हावी होने में उन्हें खास मजा आता था। भारत के खिलाफ उन्होंने 18 मैच में 62.70 की औसत से 1693 रन बनाए जबकि उनके करियर का औसत 47.53 है। कन्हाई की बल्लेबाजी के गावस्कर भी कायल थे और यही वजह थी कि उन्होंने उन्हीं के नाम पर अपने बेटे का नाम रोहन रखा। इस कैरेबियाई बल्लेबाज ने अपने टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर 256 रन भी भारत के खिलाफ 1958-59 में कोलकाता में बनाया था। वेस्टइंडीज ने उनकी इस पारी से यह मैच पारी और 336 रन से जीता था। यही नहीं 1971 में किंग्सटन में भारत ने जब वेस्टइंडीज को फॉलोऑन के लिए बुलाया था तो तब कन्हाई ने ही नाबाद 158 रन बनाकर अपनी टीम की हार टाली थी।
सन्नी रामदीन वेस्टइंडीज की तरफ से खेलने वाले भारतीय मूल के शुरूआती क्रिकेटरों में थे। इस स्पिन गेंदबाज ने भी भारत के खिलाफ छह मैच में 15 विकेट लिए।
एल्विन कालीचरण
भारतीय मूल के कैरेबियाई बल्लेबाज एल्विन कालीचरण ने भी भारत के खिलाफ देश और विदेश में अपने बल्ले का खूब रंग जमाया। उन्होंने भी अपनी सर्वोच्च व्यक्तिगत पारी (187 रन) भारत के खिलाफ खेली और 15 टेस्ट मैच में 55.86 की औसत से 1229 रन बनाए। अपने करियर में 44.43 की औसत से रन बनाने वाले कालीचरण ने इनमें से 11 टेस्ट भारतीय धरती पर खेले जिनमें उन्होंने 992 रन बनाए। कालीचरण ने भारत के खिलाफ बेंगलुरु में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था उसी में उन्होंने वनडाउन बल्लेबाज के रूप में 124 रन ठोक दिए थे, जिससे वेस्टइंडीज यह मैच 267 रन से जीतने में सफल रहा।
शिवनारायण चंद्रपाल
वेस्टइंडीज के ही शिवनारायण चंद्रपाल ने हमेशा भारतीय गेंदबाजों को अपने निशाने पर रखा। यही वजह थी कि पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने एक बार कहा था कि आप रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए वह हमेशा हमारे खिलाफ शानदार प्रदर्शन करता है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले चंद्रपाल ने भारत के खिलाफ 18 टेस्ट मैच में पांच शतक की मदद से 1581 रन बनाए हैं जिसमें उनका औसत 71.86 रहा। यह किसी भी टीम के खिलाफ उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इन पारियों में 1997 में किंग्सटन में खेली गई नाबाद 137 रन की पारी भी शामिल है, जिससे उन्होंने वेस्टइंडीज को 38 रन से जीत दिलाने में मदद की और वह मैन ऑफ द मैच बने थे।
नासिर हुसैन
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और चेन्नई में जन्में नासिर हुसैन भी कोई अपवाद नहीं हैं। भारत के खिलाफ दस मैच में 54.93 की औसत से 824 रन का रिकॉर्ड बताता है कि भारतीय गेंदबाजी उन्हें काफी रास आती रही। हुसैन ने 1996 में बर्मिंघम में भारत के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला था और इसमें 128 रन बनाकर अपनी टीम की आठ विकेट से जीत के नायक बनकर मैन ऑफ द मैच भी बने। हुसैन ने इसके अलावा 2002 में लॉर्ड्स में भी 155 रन की कप्तानी पारी खेलकर भारत पर इंग्लैंड को 170 रन से जीत दिलायी थी और इस बार भी वह मैन ऑफ द मैच बने थे। उन्होंने लीड्स में भी 110 रन बनाए लेकिन अपनी टीम की हार नहीं टाल पाए थे।
गंगा, सरवन और रामदीन
वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज डेरेन गंगा ने अपना सर्वाधिक स्कोर (135 रन) भारत के खिलाफ बनाया है। अपने पूर्वजों के इस देश के खिलाफ उन्होंने चार मैच में 49.04 की औसत से 344 रन बनाए हैं। गंगा ने सेंट कीट्स के जिस मैच में 135 रन बनाए थे उसी मैच में सरवन ने 116 रन की पारी खेली थी। सरवन हालांकि वन डे में भारत के खिलाफ अधिक सफल रहे। विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश रामदीन ने भी भारत के खिलाफ अब तक जो चार टेस्ट खेले हैं उनमें 33.20 की औसत से 166 रन बनाए हैं।

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