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स्पिनरों की मददगार भारतीय पिचों पर दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज अपने तूफानी तेवरों से जान डालने में सफल रहे हैं।
भारतीय पिचों को पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों की मददगार माना जाता है लेकिन दक्षिण अफ्रीका की टीम जब भी भारत दौरे पर आयी तब उसके तेज गेंदबाज अपने तूफानी तेवरों से इन पिचों पर भी जान डालने में सफल रहे और उन्होंने यहां अपनी टीम की सभी जीत में अहम भूमिका निभायी।
दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच भारतीय सरजमीं पर अब तक जो दस मैच खेले गये हैं उनमें से दोनों टीम ने चार-चार मैच में जीत दर्ज की है। दक्षिण अफ्रीका की जीत में जहां उसके तेज गेंदबाजों ने 20 विकेट झटकने में खास योगदान दिया वहीं भारत को अपने स्पिनरों के दम पर जीत मिल पायी।
आंकड़े भी इस बात के गवाह हैं कि दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों को भारतीय पिचों पर बहुत अधिक मुश्किलों को सामना नहीं करना पड़ा। दक्षिण अफ्रीका की तरफ से अब तक भारतीय पिचों पर गेंदबाजों ने जो 153 विकेट लिये हैं उनमें से 107 विकेट तेज गेंदबाजों के नाम पर दर्ज हैं जिससे साफ हो जाता है कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम के लिए डेल स्टेन और मोर्ने मोर्कल की अगुवाई वाले तेज आक्रमण का सामना करना आसान नहीं होगा जो भारतीय परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ भी हैं।
इसके विपरीत भारत की तरफ से इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अभी तक अपनी सरजमीं पर 149 विकेट गेंदबाजों ने लिए गए हैं। इसमें स्पिनरों का योगदान 103 विकेट है जबकि तेज गेंदबाजों को 46 विकेट मिले हैं। इनमें से अकेले जवागल श्रीनाथ के नाम पर ही पांच मैच में 21 विकेट शामिल हैं।
भारत के लिये अच्छी खबर यह है कि हरभजन सिंह ने घरेलू सरजमीं पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। फिलहाल अच्छी फार्म में नहीं चल रहे इस ऑफ स्पिनर ने अब तक पांच मैच में 32 विकेट लिए हैं जिसमें कोलकाता में 2004 में भारत की आठ विकेट की जीत में दूसरी पारी में 87 रन पर सात विकेट लेने का कारनामा भी शामिल है।
धोनी की टीम को अनिल कुंबले की कमी खलेगी जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत में नौ मैच में 39 विकेट हासिल किये हैं। ऐसे में यदि लेग स्पिनर अमित मिश्रा को हरभजन के जोड़ीदार के रूप में उतारा जाता है तो उन पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी।
भारतीय बल्लेबाजों को स्टेन से सतर्क रहने की जरूरत है जिन्होंने पिछले दौरे में अहमदाबाद में खेले गये दूसरे टेस्ट मैच में कहर बरपाकर भारत को केवल 76 रन पर ढे़र करने में अहम भूमिका निभायी थी। दक्षिण अफ्रीका ने यह मैच पारी और 90 रन से जीता था। स्टेन ने भारत में पिछले दौरे में ही तीन टेस्ट मैच खेले थे और इनमें उन्होंने 20.20 की औसत से 15 विकेट लिए थे।
मोर्कल भी पिछले दौरे में भारत आये थे जिसमें उन्होंने आठ विकेट लिए थे लेकिन मखाया एनटीनी का दक्षिण अफ्रीकी टीम में नहीं होना भारतीयों के लिए अच्छा कहा जाएगा क्योंकि इस तेज गेंदबाज ने भारतीय पिचों पर पांच मैच में 21 विकेट चटकाये हैं। वैसे युवा वायन पर्नेल इस कमी को पूरा करने के लिए तैयार हैं। भारतीय बल्लेबाजों को स्पिनर पाल हैरिस से भी सतर्क रहना होगा जिन्होंने 2008 में तीन मैच में आठ विकेट अपने नाम किये थे।

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