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विकेट का रिकॉर्ड बनाने वाले युजवेंद्र चहल को शतरंज महंगा पड़ा तो बन गए क्रिकेटर

विकेट का रिकॉर्ड बनाने वाले युजवेंद्र चहल को शतरंज महंगा पड़ा तो बन गए क्रिकेटर

1/4 विकेट का रिकॉर्ड बनाने वाले युजवेंद्र चहल को शतरंज महंगा पड़ा तो बन गए क्रिकेटर

इंग्लैंड के खिलाफ बुधवार को रिकॉर्ड गेंदबाजी के साथ भारत को जीत दिलाने वाले लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल का पहला प्यार क्रिकेट न होकर शतरंज था। चहल राज्य और राष्ट्रीय स्तर के चैंपियन रह चुके हैं। उन्होंने 2013 में जूनियर चेस वर्ल्ड कप भी खेला था मगर महंगा खेल होने के कारण इसे आगे जारी नहीं रख सके। 

उस वक्त उनकी उम्र 12-13 साल थी। तब उन्होंने अपने दूसरे पसंदीदा खेल क्रिकेट में हाथ आजमाया। शायद यही कारण है कि उनकी गेंदबाजी में भी शतरंज की बिसात सरीखे पैंतरे नजर आते हैं। 

पैसों के कारण छोड़ना पड़ा शतरंज

हरियाणा के जींद में युजवेंद्र के घर गुरुवार को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। फोन पर बातचीत में उनके पिता केके चहल ने बताया कि सनी (घर का नाम) बचपन से शतरंज में काफी अच्छा कर रहा था। जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन बनने के अलावा उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लिया, मगर आगे बढ़ने के लिए अच्छे कोच की जरूरत थी। ग्रैंड मास्टर स्तर के कोच पर महीने में एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो जाते हैं। यह हमारे बूते की बात नहीं थी। लिहाजा उसे शतरंज छोड़ना पड़ा। सनी क्रिकेट में ज्यादा रुचि लेने लगा तो उनके खेल करियर को लेकर परिवार का तनाव कम हुआ। 

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खेती की जमीन पर बनाया क्रिकेट का मैदान 

पिता ने बताया, 'जींद में क्रिकेट की सुविधाएं अच्छी नहीं थी। हमने खेती की जमीन में डेढ़ एकड़ के हिस्से में उसके लिए मैदान तैयार कराया। वह अकेले ही घंटों अभ्यास करता। जींद से करीब 50 किलोमीटर दूर रोहतक में लगने वाले कैंपों में हिस्सा दिलाना शुरू किया। जब उसका अंडर-19 टीम में चयन हुआ तब हमें भरोसा हुआ कि वह क्रिकेट में करियर बना लेगा। केके चहल पेशे से वकील होने के साथ हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी हैं। 

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  • Web Title:yuzvendra chahal wanted to shatranj player but due to economic reason he became cricketer