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VIDEO: 'अफगानिस्तान का सिद्धू' गुरु से नहीं मिल सका

VIDEO: 'अफगानिस्तान का सिद्धू' गुरु से नहीं मिल सका

अफगानिस्तान के पहले हिंदी कमेंटेटर शरफुद्दीन शाकिर आयरलैंड के खिलाफ क्रिकेट सीरीज के बाद भारत में भी पहचाने जाने लगे हैं। पर अपने 'गुरु' से मिलने की उनकी सबसे बड़ी इच्छा इस बार पूरी नहीं हो सकी। शाकिर ने पूर्व क्रिकेटर और अपनी ही शैली की कमेंटरी ईजाद करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को देखकर न सिर्फ हिंदी सीखी बल्कि कमेंटरी में उनके अंदाज के मुहावरों पर भी पकड़ बनाई। 

ग्रेटर नोएडा में आयरलैंड के खिलाफ अफगानिस्तान का आखिरी मैच खत्म होने के बाद उन्होंने स्थानीय दोस्तों के साथ 'सिद्धू पाजी' से मिलने की ठानी। शनिवार को वह पूरा दिन उनसे मिलने की कोशिशों में लगे रहे। उन्हें दिल्ली पहुंचकर पता लगा कि सिद्धू, कपिल शर्मा के कॉमेडी शो के सिलसिले में मुंबई में हैं। पूरी अफगान टीम और शाकिर के साथी स्वदेश लौट चुके हैं। पर वह सिर्फ इसी हसरत के साथ रुके हैं। वह कहते हैं यदि सिद्धू साहब से मिलने की तमन्ना पूरी हो गई तो वह सोमवार सुबह की वापसी भी टाल देंगे। 

'अफगानिस्तान का सिद्धू'

अफगान टीम के उपप्रवक्ता शाकिर अपने बोर्ड के आधिकारिक कमेंटेटर भी हैं। वह कहते हैं कि सिद्धूजी की आवाज में जो मिठास और अंदाज है वह किसी और में नहीं। वह उनके कमेंटरी के वीडियो डाउनलोड कर घर में कंप्यूटर के सामने हिंदी का अभ्यास करते और तकनीकी बातें भी सीखी। अफगानिस्तान की सबसे बड़ी घरेलू क्रिकेट लीग 'श्पागिजा' में कमेंटरी करने के दौरान भी वह सिद्धू के जुमलों को पश्तो में अनुवाद कर खूब इस्तेमाल करते हैं। इस कारण उन्हें 'अफगानिस्तान का सिद्धू' भी कहा जाने लगा है। 

पहली बार डर लगा

बीते पखवाड़े आयरलैंड के खिलाफ अपनी टीम के तीसरे टी-20 मैच में उन्होंने दूरदर्शन पर भारतीय दिग्गजों के साथ पहली बार हिंदी में कमेंटरी की। उन्हें यह डर भी लगा कि भारतीय हिंदी भाषा के साथ 'तोड़फोड़' पर नाराज न हो जाएं। पर जल्द वह सहज हो गए।

गरीबी के दिन

शाकिर का बचपन गरीबी में बीता। सुबह स्कूली पढ़ाई करने के बाद वह पिता और तीन चाचाओं के साथ दिहाड़ी करते थे। पिता उन्हें काम करने पर डांटते थे पर बूढ़े पिता को देखकर उनका दिल नहीं मानता था। शाकिर का पहला प्यार फुटबॉल था। वह गोलकीपर रहे। धीरे-धीरे उनका रुझान क्रिकेट की ओर होता गया। शाकिर मानते हैं कि चालीस साल की लंबी जंग के बाद क्रिकेट ने अफगानिस्तान को जोड़ने का काम किया है। 

बता दें कि अफगानिस्तान ने 2014-15 में शारजाह को छोड़ गे्रटर नोएडा के शहीद विजय सिंह पथिक स्टेडियम को अपना घरेलू मैदान बनाया था। उनके ज्यादातर खिलाडि़यों ने बगैर किसी अध्यापक के भारतीय फिल्में देखकर हिंदी सीखी है। चार-पांच खिलाड़ी अच्छी हिंदी बोल लेते हैं। 

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  • Web Title:siddhu of afghanistan didnt met with navjot singh siddhu