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वित्तीय साख पर अब फिच का बट्टा
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:18-06-12 07:51 PM
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एसएंडपी के बाद वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने भी भारत की वित्तीय साख पर लाल घेरा लगा दिया है। फिच ने भ्रष्टाचार, अपर्याप्त सुधार, ऊंची मुद्रास्फीति और वृद्धि दर में गिरावट का हवाला देते हुए कहा है कि देश की वित्तीय हालत आने वाले समय में और बिगड़ सकती है।

रेटिंग एजेंसी ने सार्वजनिक क्षेत्र की गेल, इंडियन आयल, एनटीपीसी एवं चार अन्य कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग का परिदृश्य भी घटा दिया है। हालांकि, उसने कहा कि भारत की रेटिंग परिदृश्य से निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज प्रभावित नहीं होगी।

इस बीच, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि फिच की कार्रवाई पुराने आंकड़ों पर आधारित है। उसने अर्थव्यवस्था में हाल ही में आए सकारात्मक रुख को नजरअंदाज किया है।

मुखर्जी ने एक बयान जारी कर कहा कि जहां बाजार पहले ही यह अनुमान लगा चुका था कि फिच परिदृश्य में संशोधन करेगी। इसलिए, इस घोषणा में कोई चौकाने वाली बात नहीं है। यह देखने वाली बात है कि फिच ने पुराने आंकड़ों पर भरोसा किया और भारतीय अर्थव्यवस्था में हाल के सकारात्मक रुखों को नजरअंदाज किया।

वित्त मंत्री ने कहा कि फिच ने हाल ही में सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों पर ध्यान नहीं दिया। मसलन, फर्टिलाइजर सब्सिडी सुधार, नई विनिर्माण व दूरसंचार नीतियां आदि। इसने (फिच) भारत में लोक वित्त की मजबूती की प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दिया। साथ ही इसने सरकारी ऋण जीडीपी अनुपात में हाल ही में आई कमी को भी नजरअंदाज किया।

फिच की इस तरह की साख से वैश्विक बाजार में भारत के सरकारी, गैर सरकारी प्रतिष्ठानों के लिए कर्ज की दर महंगी हो सकती है। भारत की वित्तीय साख के परिदृश्य को स्थिर से प्रतिकूल वर्ग में डालते हुए फिच ने कहा कि भारत को धीमी वृद्धि दर और ऊंची मुद्रास्फीति के विचित्र संयोग का सामना करना पड़ रहा है। देश को निवेश वातावरण के आसपास भ्रष्टाचार और अपर्याप्त आर्थिक सुधार के रूप में ढांचागत चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

वहीं दूसरी ओर, मुखर्जी ने कहा कि रेटिंग एजेंसी ने आर्थिक वृद्धि की संभावना, मुद्रास्फीति दबाव और कमजोर सरकारी वित्त पर जो चिंता व्यक्त की है, उस पर सरकार पहले से ध्यान दे रही है।

इससे पहले, अप्रैल में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) भी भारत की साख का परिदृश्य स्थायी से घटाकर नकारात्मक कर चुकी है। उसने 11 जून को चेतावनी भी दी कि भारत की क्रेडिट रेटिंग निवेश ग्रेड से नीचे सट्टेबाजी की श्रेणी में रखी जा सकता है और भारत निवेश स्तर की साख गंवाने वाला पहला ब्रिक देश में पहला देश बन सकता है।

फिच ने कहा कि परिदृश्य में संशोधन इस बात का संकेत देता है कि अगर आगे ढांचागत सुधार के कदम नहीं उठाए जाते हैं तो भारत की मध्यम से दीर्घकालीन वृद्धि दर की संभावना और खराब होगी।

 
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