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राजधानी के मोबाइल फोनधारक राहत की सांस ले सकते हैं। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने कहा है कि वह दिल्ली के अवैध मोबाइल टावरों के खिलाफ किसी तरह का सीलिंग अभियान नहीं चलाएगा। एमसीडी ने ऐसे टावर लगाने वाले आपरेटरों को इनका नियमन करवाने के लिए एक माह का समय दिया है। आपरेटरों को एक माह में इसके लिए आवेदन करना होगा।
निगम की मोबाइल टावरों पर नई नीति को एमसीडी की स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है। समिति के चेयरमैन राम किशन सिंघल ने कहा कि हम दिल्ली में अफरातफरी तथा मोबाइल नेटवर्क में बाधा नहीं चाहते हैं। हम अवैध टावरों के खिलाफ अभियान नहीं चलाएंगे।
सिंघल ने हालांकि कहा कि जिन भी आपरेटरों ने निगम की मंजूरी के बिना टावर लगाया है, उन्हें इनका नियमन कराने के लिए एक माह का समय दिया गया है। यदि एक माह में वह यह काम पूरा नहीं कर सके, तो टावर को नीति के तहत गिरा दिया जाएगा।
नगर निगम में सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा है कि मोबाइल टावरों से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को वैज्ञानिक तरीके से साबित नहीं किया जा सका है।
भाजपा पार्षद विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि एमसीडी ने इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन :डब्ल्यूएचओ: से राय मांगी थी। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि बेस स्टेशन और वायरलेस नेटवर्क से निकलने वाले कमजोर सिग्नल से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

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