बुधवार, 08 जुलाई, 2015 | 01:24 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    VIDEO: शाहिद और मीरा विवाह के पवित्र बंधन में बंधे, देखिए दिलकश तस्वीरें कुमाऊं में भारी बारिश से 44 मार्ग बंद, केदार पैदल यात्रा भी नहीं हुई शुरू टर्किश एयरलाइंस के विमान को उड़ान की मंजूरी, कोई बम नहीं मिला दिल्ली छोड़कर जा रहा है 'चीकू', क्या आपको भी है खबर व्यापमं मामला: शिवराज पर बढ़ा दबाव, सीबीआई जांच को हुए तैयार गंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ का खतरा सदी की सबसे बड़ी फाइट जीतकर भी हार गए मेवेदर, जानिए कैसे बख्शे नहीं जाएंगे थाने में महिला को जलाकर मारने के दोषी: अखिलेश यादव PHOTO: धौनी के लिए प्रशंसक ने बनवाया खास केक, आप भी देखें गूगल अर्थ में जल्द दिखेगा भारत के शहरों का एरियल व्यू
रिलायंस, केयर्न को उत्पादक क्षेत्रों में और उत्खनन की मंजूरी मिली
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-01-13 05:18 PMLast Updated:04-01-13 05:27 PM
Image Loading

पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने मंत्रालय का प्रभार संभालने के बाद लिए गए अपने पहले बड़े फैसले में रिलायंस इंडस्ट्रीज और केयर्न इंडिया को कुछ शर्तों के साथ पहले से उत्पादन कर रहे क्षेत्रों में तेल एवं गैस उत्खनन की मंजूरी दे दी।

इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय जो इस प्रस्ताव को एक साल से दबाए बैठा था, ने हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय को इस सप्ताह लिखा कि पहले से उत्पादन कर रहे तेल एवं गैस क्षेत्र में उत्खनन की इजाजत देने का फैसला किया गया है।

मोइली ने पिछले साल अक्टूबर में पेट्रोलियम मंत्रालय का कार्य-भार संभालने के बाद तेल एवं गैस उत्खनन क्षेत्र में यह निर्णय लिया है। इन कंपनियों को उत्पादन कर रहे तेल एवं गैस क्षेत्र में तेल कूपों के उत्खनन की मंजूरी इस शर्त पर दी गई है कि उन्हें लागत वसूली की इजाजत तभी मिलेगी जब ऐसे कूपों का वाणिज्यिक उपयोग हो सकेगा।

इसका मतलब यह है कि ऐसे किसी भी तेल कूप की खुदाई लागत को तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि यहां पेट्रोलियम भंडार नहीं मिलता या फिर उक्त तेलकूप से स्वतंत्र रूप से उत्पादन नहीं किया जाता है।

वर्तमान में आपरेटर को किसी क्षेत्र में तेल एवं गैस खोज पर होनी वाली पूरी लागत की भरपाई क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस को बेचने से होने वाली आय की भरपाई से हो जाती है। जिस क्षेत्र मे तेल अथवा गैस का उत्पादन होता है, वहां घेरा लगा दिया जाता है।

हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय ने इससे पहले कहा था कि इस प्रकार बाड़ लगाकर घेरे गए क्षेत्र के भीतर और तेल खुदाई की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि इसमें और खुदाई पर आने वाली लागत की वसूली होने से क्षेत्र में सरकार के लाभ पर असर होगा।

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
क्रिकेट स्कोरबोर्ड