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दूरसंचार कंपनियों के समर्थन में उतरा CII
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:06-05-12 12:36 PM
दूरसंचार उद्योग की ट्राई की सिफारिशों की समीक्षा की मांग का समर्थन करते हुए उद्योग मंडल सीआईआई ने कहा है कि स्पेक्ट्रम नीलामी का आरक्षित मूल्य बहुत अधिक है। इससे राष्ट्रीय हित, समावेशी वृद्धि प्रभावित होगी और यह उद्योग की वृद्धि में भी बाधक होगा।
सीआईआई ने कहा कि उसका मानना है कि फिलहाल उच्चतम न्यायालय के फैसले का अनुपालन करते हुए सिर्फ 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पर विचार किया जाना चाहिए। सीआईआई ने एक बयान में कहा ट्राई ने नीलामी के लिए जिस आरक्षित मूल्य की सिफारिश की है वह बहुत अधिक है जिससे राष्ट्रीय व समावेशी वृद्धि प्रभावित होगी और उद्योग विशेष तौर पर ग्रामीण इलाकों में दूरसंचार व ब्राडबैंड सेवा बाधित होगी।
ट्राई ने अखिल-भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए 3,622 रुपये प्रति मेगाहर्टज का आधार मूल्य तय किया है। यह तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 2008 में आवंटित 2जी लाइसेंस के मूल्य के मुकाबले 10 गुना अधिक है।
सीआईआई ने इस संबंध में दूरसंचार विभाग को की गई सिफारिश में कहा है कि आरक्षित मूल्य पर ट्राई की सिफारिश वास्तविक प्रौद्योगिकी-आर्थिक सिद्धांतों पर आधारित नहीं है। सीआईआई ने कहा कि तर्कसंगत मूल्य पर स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराना आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चत कराया जा सके कि मोबाइल फोन शुल्क सामाजिक-आर्थिक फायदे और समावेशी वद्धि के अनुरूप रहे।
उद्योग मंडल ने कहा कि स्पेक्ट्रम नीलामी इस तरह होनी चाहिए कि यह राष्ट्रीय और सामाजिक हितों के अनुरूप हो।
सीआईआई ने कहा कि उसका मानना है कि फिलहाल उच्चतम न्यायालय के फैसले का अनुपालन करते हुए सिर्फ 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पर विचार किया जाना चाहिए। सीआईआई ने एक बयान में कहा ट्राई ने नीलामी के लिए जिस आरक्षित मूल्य की सिफारिश की है वह बहुत अधिक है जिससे राष्ट्रीय व समावेशी वृद्धि प्रभावित होगी और उद्योग विशेष तौर पर ग्रामीण इलाकों में दूरसंचार व ब्राडबैंड सेवा बाधित होगी।
ट्राई ने अखिल-भारतीय स्पेक्ट्रम के लिए 3,622 रुपये प्रति मेगाहर्टज का आधार मूल्य तय किया है। यह तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 2008 में आवंटित 2जी लाइसेंस के मूल्य के मुकाबले 10 गुना अधिक है।
सीआईआई ने इस संबंध में दूरसंचार विभाग को की गई सिफारिश में कहा है कि आरक्षित मूल्य पर ट्राई की सिफारिश वास्तविक प्रौद्योगिकी-आर्थिक सिद्धांतों पर आधारित नहीं है। सीआईआई ने कहा कि तर्कसंगत मूल्य पर स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराना आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चत कराया जा सके कि मोबाइल फोन शुल्क सामाजिक-आर्थिक फायदे और समावेशी वद्धि के अनुरूप रहे।
उद्योग मंडल ने कहा कि स्पेक्ट्रम नीलामी इस तरह होनी चाहिए कि यह राष्ट्रीय और सामाजिक हितों के अनुरूप हो।
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