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बैंक प्राधिकृत शेयर पूंजी बढ़ा सकते हैं: वित्त मंत्रालय
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:21-12-12 11:08 PM
Last Updated:21-12-12 11:31 PM
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब राइट और बोनस शेयर जारी करते समय अपनी प्राधिकत शेयर पूंजी को बढ़ा सकते हैं। उन्हें अब इस मामले में 3,000 करोड़ रुपए की अधिकतम सीमा में बंधे रहने की जरूरत नहीं होगी।
संसद में बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक 2012 पारित होने के बाद बैंकों की अधिकतम शेयर पूंजी से यह प्रतिबंध उठा लिया गया है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। इसके बाद बैंकों को शेयर पूंजी में बदलाव लाने का अधिकार मिल जायेगा, हालांकि इसके लिए उन्हें सरकार और रिजर्व बैंक की अनुमति लेनी होगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इस कानून के बाद बैंकों के लिये सरकार और रिजर्व बैंक की अनुमति के बाद अपनी प्राधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने अथवा घटाने का रास्ता खुल जायेगा। इस मामले में अधिकतम 3,000 करोड़ रुपए की शेयरपूंजी की सीमा भी आड़े नहीं आएगी।
सरकार को संसद में बैंकिंग नियमन संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए बैंकों को वायदा कारोबार में प्रवेश की अनुमति देने वाले विवादास्पद प्रावधान को हटाना पड़ा। इस विधेयक के पारित होने के बाद रिजर्व बैंक के लिए नए बैंक लाइसेंस जारी करने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।
विधेयक में संशोधन के जरिए रिजर्व बैंक को बैंकिंग कंपनियों के निदेशक मंडल को अपने अधिकार में लेने की शक्ति दी गई है। ऐसे मामले में रिजर्व बैंक उचित व्यवस्था होने तक बैंक में अपना प्रशासक नियुक्त कर सकता है।
बैंकिंग नियमन संशोधन विधेयक में बैंकों में मताधिकार सीमा बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। इसमें रिजर्व बैंक को बैंकिंग कंपनियों के बारे में सूचना जुटाने और निरीक्षण का भी अधिकार है। प्राथमिक सहकारी समितियों को केवल बैंकिंग कारोबार करने की अनुमति भी इसमें दी गई है।
विधेयक में बैंकों में जमापूंजी रखने वालों को शिक्षित और जागरूक बनाने के लिये एक कोष बनाने का भी प्रावधान है। बैंकों में ऐसे खातों में पड़ी राशि जिसका कोई लेनदार नहीं है, उससे यह कोष बनाया जायेगा।
संशोधन विधेयक राज्यसभा में पारित होने के बाद वित्त मंत्री चिदंबरम ने रिजर्व बैंक से नये बैंकों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। पिछले दो दशकों में रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र में 12 बैंकों को लाइसेंस जारी किये। वर्ष 1993 में दस बैंकों को को बाद में दो और बैंकों को लाइसेंस दिये गये। देश में इस समय सार्वजनिक क्षेत्र के 26 और आठ विदेशी बैंकों सहित कुल मिलाकर 53 वाणिज्यिक बैंक हैं।
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