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रायबरेली में लगेगा रेल पहिये बनाने का कारखाना
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:21-12-12 09:03 PMLast Updated:21-12-12 09:14 PM
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रेलगाड़ी के लिए पहियों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने को लेकर रेलवे ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली में 1,000 करोड़ रुपए के निवेश से रेल पहिया फोर्जिंग कारखाना लगाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की राष्ट्रीय इस्पात निगम लि. (आरआईएनएल) के साथ शुक्रवार को समझौता किया।

इस कारखाने के शुरू होने से रेल पहियों के आयात पर निर्भरता कम होगी जो फिलहाल करीब 350 करोड़ रुपए सालाना है। सहमति पत्र पर दस्तखत करने के बाद रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि 1,000 करोड़ रुपए के निवेश से लगने वाला कारखाना रायबरेली के लालगंज स्थित मौजूदा रेल डिब्बा फैक्टरी के समीप होगा।

इस मौके पर मौजूद इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि परियोजना न केवल रेलवे के लिए बल्कि इस्पात विनिर्माताओं के लिए फायदेमंद है। इसका उत्तर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा।

उन्होंने कहा कि इससे 500 से 600 लोगों को रोगजार मिलेगा।
 रेलवे को सालाना 70,000 पहियों की जरूरत होती है जिसे आयात के जरिए पूरा किया जाता है। एक पहिये की लागत करीब 70,000 रुपए है। 2016-17 तक यह संख्या एक लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

प्रस्तावित कारखाने की क्षमता 1,00,000 पहिया सालाना होगी। इस लिहाज से यह देश में रेल पहिया बनाने का सबसे बड़ा कारखाना होगा। इस्पात मंत्रालय के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की आरआईएनएल 27 एकड़ जमीन में कारखाना लगाएगी। जमीन रेलवे की तरफ से उपलब्ध कराई जाएगी।

दूसरा समझौता रेलवे तथा इस्पात मंत्रालय की इकाई एनएमडीसी लि के बीच हुआ। यह छत्तीसगढ़ में किरनडूल से जगदलपुर के बीच 150 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिये है। इस पर 826 करोड़ रुपए का खर्चा आने का अनुमान है।

इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि लाइन के दोहरीकरण से विकास का नया युग शुरू होगा। इससे राज्य के बस्तर जिले के साथ समीप के राज्यों ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के स्थानीय जनजातीय समुदाय के लोगों के जीवन में बदलाव लाने में भी मदद मिलेगी।

 
 
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