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आयकर छूट सीमा तीन लाख रुपए हो: एसोचैम
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:03-12-12 05:30 PM
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उद्योग मंडल एसोचैम ने निवेश और उपभोक्ता मांग बढ़ाने के लिए अगले आम बजट में व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपए करने और कंपनी कर की दर 30 प्रतिशत से कम कर 25 प्रतिशत करने की सिफारिश की है।

एसोसियेटिड चैंबर्स ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने 2013-14 के बजट पूर्व ज्ञापन में कहा है कि देश दुनिया भर में में व्याप्त आर्थिक मंदी को देखते हुए भारत में उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर की दरें फिर घटाकर आठ प्रतिशत की जानी चाहिए।

एसोचैम ने रीयल एस्टेट क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए आवास ऋणों के 5 लाख रुपए तक ब्याज पर आयकर कटौती होनी चाहिए। अभी डेढ़ लाख रुपए तक के ब्याज को आय से घटाया जाता है।

एसोचैम अध्यक्ष एवं सांसद राजकुमार एन धूत ने बजट पूर्व ज्ञापन जारी करते हुए कहा हमने सब्सिडी के मामले में भी सरकार को डीजल, घरेलू रसोई गैस और मिट्टी तेल पर धीरे धीरे सब्सिडी कम करने का सुझाव दिया है।

पेट्रोलियम उत्पादों पर सरकार को 1,00,000 करोड़ रुपए की भारी सब्सिडी देनी पड़ती है, यह राशि काफी ज्यादा है, सरकार हर साल इतनी सब्सिडी नहीं देते रह सकती है, इसे धीरे धीरे कम किया जाना चाहिए।

सरकार ने पिछले बजट में व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को 1.80 लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया था। दो लाख से पांच लाख रुपए की सालाना आय पर 10 प्रतिशत और पांच से लेकर 10 लाख रुपए की आय पर 20 प्रतिशत की दर से कर लगाया गया।

10 लाख रुपए से अधिक आय को 30 प्रतिशत कर के दायरे में रखा गया। धूत ने कहा कि 60 साल से कम आयु वाले व्यक्तिगत कर दाताओं को तीन लाख रुपए तक की आय पर छूट दी जानी चाहिए, इससे लोग स्वेच्छा से कर भुगतान के लिये आगे आएंगे।

ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 60 वर्ष की आयु पार कर चुके व्यक्तिगत आयकरदाताओं की 3.50 लाख रुपए तक की आय को करमुक्त रखा जाना चाहिए।

वित्त मंत्री पी़ चिदंबरम को सौंपे बजट पूर्व ज्ञापन में धूत ने कहा कि दरें कम होने से अनुपालन बढ़ेगा, खपत और बचत बढ़ेगी तथा कर प्रशासन की अनुपालन लागत में कमी आएगी। उन्होंने चिकित्सा व्यय पर मिलने वाली छूट को भी 15,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए सालाना करने का सुझाव दिया है।

एसोचैम कर परिषद के अध्यक्ष एवं सहअध्यक्ष वेद जैन और ज़ेक़े मित्तल ने इस अवसर पर कहा वैश्विक वित्तीय संकट के चलते देश में भी औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुई है। ऊंची मुद्रास्फीति और कमजोर पूंजी निवेश को देखते हुए उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर दर को वापस 12 से घटाकर 8 प्रतिशत पर लाया जाना चाहिए।

इससे पहले सरकार ने उद्योगों को प्रोत्साहन स्वरुप वर्ष 2008-09 की मंदी के दौरान उत्पाद एवं सेवाकर की दरें 12 से घटाकर आठ प्रतिशत पर ला दी थीं।

उन्होंने कहा उद्योगों के मामले में प्लांट एवं मशीनरी की घिसावट की मूल्यह्रास दर  मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर फिर से 25 प्रतिशत होनी चाहिए। ज्ञापन में कहा गया है कि वस्तु एवं सेवाकर के आने से कर आधार पहले ही काफी व्यापक होने जा रहा है ऐसे में उत्पाद एवं सेवाशुल्क में की जानी वाली कमी को चुनींदा वस्तुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाकर उसकी भरपाई की जा सकती है।

वेद जैन ने कहा कि ऐसे समय जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कठिन दौर से गुजर रही है, भारतीय उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग को अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में बहुस्तरीय कर ढांचे से कई तरह की दिक्कतें हो रहीं हैं।

 

 
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