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'उत्तरी ग्रिड फेल होने के लिए मप्र जिम्मेदार नहीं'
भोपाल, एजेंसी
First Published:04-08-12 01:16 PM
मध्यप्रदेश के उर्जा विभाग ने उत्तरी ग्रिड फेल होने के लिए राज्य को भी जिम्मेदार बताए जाने को पूर्णत: असत्य और निराधार बताया है।
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने कहा कि गत 30 और 31 जुलाई को ग्रिड फेल होते समय मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता की स्थिति को देखा जाए तो स्थिति अपने-आप स्पष्ट हो जाएगी कि मध्यप्रदेश ने दोनों दिन ग्रिड फेल होते समय किसी भी प्रकार का कोई ओवर-ड्रा नहीं किया। दोनों ही दिन प्रदेश अपनी आवश्यकता पूरी करने के साथ अन्य राज्यों को भी बिजली दे रहा था।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि गत 30 जुलाई को उत्तरी ग्रिड फेल होने के ठीक पहले रात्रि दो बज कर 32 मिनट पर पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया की 400 केवी़ बीना-ग्वालियर लाइन पर 1030 मेगावाट विद्युत का प्रवाह बीना से ग्वालियर की तरफ हो रहा था।
इसी में से 1009 मेगावाट विद्युत ग्वालियर से आगरा की ओर जा रही थी। इससे स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश द्वारा इस लाइन से नगण्य विद्युत प्राप्त की जा रही थी।
इस समय मध्यप्रदेश केन्द्रीय क्षेत्र के अपने हिस्से 1633 मेगावाट के विरुद्ध मात्र 1190 मेगावाट विद्युत का उपयोग कर रहा था। शेष 443 मेगावाट बिजली का उपयोग अन्य राज्यों द्वारा किया जा रहा था।
कंपनी ने कहा कि इसी प्रकार गत 31 जुलाई को दोपहर 12 बज कर 55 मिनट पर उत्तरी ग्रिड फेल होने के पूर्व 400 केवी़ बीना-ग्वालियर लाइन पर 934 मेगावाट विद्युत का प्रवाह बीना से ग्वालियर की ओर हो रहा था। इसी में से 927 मेगावाट विद्युत ग्वालियर से आगरा की ओर जा रही थी। इस दौरान भी मध्यप्रदेश द्वारा इस लाइन से प्राप्त की जाने वाली विद्युत की मात्रा नगण्य थी। इस समय भी मध्यप्रदेश केन्द्रीय क्षेत्र के अपने हिस्से 1523 मेगावाट के विरुद्ध 1442 मेगावाट विद्युत का उपयोग कर रहा था। शेष 81 मेगावाट बिजली का उपयोग अन्य राज्यों द्वारा किया जा रहा था।
ग्रिड के फेल होते समय गत 30 एवं 31 जुलाई को मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त थी। दोनों दिन 443 और 81 मेगावाट अंडर-ड्रा की स्थिति थी। इससे स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश द्वारा ओवर-ड्रा करने यानी जरूरत से अधिक बिजली लेने का प्रश्न ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि इसी तरह ग्रिड फेल होते समय 30 एवं 31 जुलाई को मध्यप्रदेश के सभी ताप और जल विद्युतगह पर्याप्त विद्युत उत्पादन कर रहे थे, किन्तु ग्रिड फेल होने के कारण मध्यप्रदेश द्वारा अन्य राज्यों को भेजी जा रही बिजली आकस्मिक रूप से एक गई। इससे मध्यप्रदेश तथा पश्चिम ग्रिड में बिजली की उपलब्धता अधिक होने के कारण फ्रिक्वेंसी खतरनाक तरह से बढ़ने लगी। उस समय राज्य के पश्चिम ग्रिड को अंधकार से बचाने के लिए प्रदेश के सभी जल विद्युतगृह तत्काल बंद कर दिए गए। साथ ही ताप विद्युतगृहों से भी बिजली का उत्पादन कम कर दिया गया ताकि फ्रिक्वेंसी संतुलित रहे और पश्चिमी ग्रिड अंधकार से बच सके।
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने कहा कि गत 30 और 31 जुलाई को ग्रिड फेल होते समय मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता की स्थिति को देखा जाए तो स्थिति अपने-आप स्पष्ट हो जाएगी कि मध्यप्रदेश ने दोनों दिन ग्रिड फेल होते समय किसी भी प्रकार का कोई ओवर-ड्रा नहीं किया। दोनों ही दिन प्रदेश अपनी आवश्यकता पूरी करने के साथ अन्य राज्यों को भी बिजली दे रहा था।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि गत 30 जुलाई को उत्तरी ग्रिड फेल होने के ठीक पहले रात्रि दो बज कर 32 मिनट पर पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया की 400 केवी़ बीना-ग्वालियर लाइन पर 1030 मेगावाट विद्युत का प्रवाह बीना से ग्वालियर की तरफ हो रहा था।
कंपनी ने कहा कि इसी प्रकार गत 31 जुलाई को दोपहर 12 बज कर 55 मिनट पर उत्तरी ग्रिड फेल होने के पूर्व 400 केवी़ बीना-ग्वालियर लाइन पर 934 मेगावाट विद्युत का प्रवाह बीना से ग्वालियर की ओर हो रहा था। इसी में से 927 मेगावाट विद्युत ग्वालियर से आगरा की ओर जा रही थी। इस दौरान भी मध्यप्रदेश द्वारा इस लाइन से प्राप्त की जाने वाली विद्युत की मात्रा नगण्य थी। इस समय भी मध्यप्रदेश केन्द्रीय क्षेत्र के अपने हिस्से 1523 मेगावाट के विरुद्ध 1442 मेगावाट विद्युत का उपयोग कर रहा था। शेष 81 मेगावाट बिजली का उपयोग अन्य राज्यों द्वारा किया जा रहा था।
ग्रिड के फेल होते समय गत 30 एवं 31 जुलाई को मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त थी। दोनों दिन 443 और 81 मेगावाट अंडर-ड्रा की स्थिति थी। इससे स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश द्वारा ओवर-ड्रा करने यानी जरूरत से अधिक बिजली लेने का प्रश्न ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि इसी तरह ग्रिड फेल होते समय 30 एवं 31 जुलाई को मध्यप्रदेश के सभी ताप और जल विद्युतगह पर्याप्त विद्युत उत्पादन कर रहे थे, किन्तु ग्रिड फेल होने के कारण मध्यप्रदेश द्वारा अन्य राज्यों को भेजी जा रही बिजली आकस्मिक रूप से एक गई। इससे मध्यप्रदेश तथा पश्चिम ग्रिड में बिजली की उपलब्धता अधिक होने के कारण फ्रिक्वेंसी खतरनाक तरह से बढ़ने लगी। उस समय राज्य के पश्चिम ग्रिड को अंधकार से बचाने के लिए प्रदेश के सभी जल विद्युतगृह तत्काल बंद कर दिए गए। साथ ही ताप विद्युतगृहों से भी बिजली का उत्पादन कम कर दिया गया ताकि फ्रिक्वेंसी संतुलित रहे और पश्चिमी ग्रिड अंधकार से बच सके।
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