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देश में अभी सूखे की स्थिति नहीं: पवार
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:16-07-12 03:15 PM
मानसून के विलंब से आने और अब तक बारिश कम रहने बावजूद सरकार ने सोमवार को कहा कि अभी देश में सूखे के हालात पैदा नहीं हुए हैं। पर उसे लगता है कि खाद्यान्न उत्पादन के पिछले बार के कीर्तिमान को बनाए रखना एक चुनौती होगी।
कृषि मंत्री शरद पवार ने सोमवार को कहा कि फिलहाल हमारे सामने सूखे की स्थिति नहीं हैं। इस साल मानसून लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। ऐसे में हमारे किसानों के सामने पिछले दो साल के प्रदर्शन का बरकरार रखने की चुनौती है।
भारत में कृषि की जीवन रेखा माना जानेवाला दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में पांच जून को प्रवेश किया, लेकिन देश के शेष हिस्से में इसके प्रसार एक-एक कर और धीमा हुआ। वर्षा कम होने से धान और मोटे अनाजों की बुवाई प्रभावित हुई है।
पवार ने आईसीएआर स्थापना दिवस के मौके पर कहा कि इस साल हमारे सामने कम बारिश के मद्देनजर कृषि क्षेत्र की चार फीसदी वृद्धि को बरकरार रखने की चुनौती है। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी मौजूद थे।
भारत में जुलाई से जून 2011-12 फसल वर्ष में 25 करोड़ 25.6 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ। वर्ष के दौरान गेहूं और चावल का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन दर्ज किया गया।
पवार ने कहा कि पिछले वर्ष बेहतर उत्पादन के कारण हमने पहली बार 50 लाख टन गैर बासमती चावल, 15 लाख टन गेहूं, एक करोड़ 15 लाख गांठ कपास का निर्यात किया है।
पिछले सप्ताह कृषि मंत्री ने कहा था कि सरकार कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र में कमजोर बरसात को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा था कि इससे उन क्षेत्रों में मोटे अनाज की बुवाई और पेयजल की आपूर्ति को प्रभावित हो सकती है।
पवार ने कहा था कि इन दो राज्यो में मोटे अनाज (बाजरा, ज्वार और मक्का) तथा पेयजल की आपूर्ति के संदर्भ में चिंता जरूर है।
कृषि मंत्री शरद पवार ने सोमवार को कहा कि फिलहाल हमारे सामने सूखे की स्थिति नहीं हैं। इस साल मानसून लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। ऐसे में हमारे किसानों के सामने पिछले दो साल के प्रदर्शन का बरकरार रखने की चुनौती है।
भारत में कृषि की जीवन रेखा माना जानेवाला दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में पांच जून को प्रवेश किया, लेकिन देश के शेष हिस्से में इसके प्रसार एक-एक कर और धीमा हुआ। वर्षा कम होने से धान और मोटे अनाजों की बुवाई प्रभावित हुई है।
पवार ने आईसीएआर स्थापना दिवस के मौके पर कहा कि इस साल हमारे सामने कम बारिश के मद्देनजर कृषि क्षेत्र की चार फीसदी वृद्धि को बरकरार रखने की चुनौती है। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी मौजूद थे।
भारत में जुलाई से जून 2011-12 फसल वर्ष में 25 करोड़ 25.6 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ। वर्ष के दौरान गेहूं और चावल का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन दर्ज किया गया।
पवार ने कहा कि पिछले वर्ष बेहतर उत्पादन के कारण हमने पहली बार 50 लाख टन गैर बासमती चावल, 15 लाख टन गेहूं, एक करोड़ 15 लाख गांठ कपास का निर्यात किया है।
पिछले सप्ताह कृषि मंत्री ने कहा था कि सरकार कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र में कमजोर बरसात को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा था कि इससे उन क्षेत्रों में मोटे अनाज की बुवाई और पेयजल की आपूर्ति को प्रभावित हो सकती है।
पवार ने कहा था कि इन दो राज्यो में मोटे अनाज (बाजरा, ज्वार और मक्का) तथा पेयजल की आपूर्ति के संदर्भ में चिंता जरूर है।
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