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वैस का बाजार होगा 32,280 करोड़ रुपए का
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-07-12 08:25 PM
मोबाइल की मूल्यवर्धित सेवाओं (वैसा) का बाजार 2013 तक बढ़कर 33,280 करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन आफ इंडिया के एक अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एम-वैस का बाजार यानी रिंगटोन और एसएमएस आधारित एप्लिकेशंस आदि का बाजार 2012 में 28 प्रतिशत बढ़ेगा। फिलहाल यह बाजार 26,000 करोड़ रुपये का है। इसमें कहा गया है कि मार्च, 2012 तक देश में मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 4.8 करोड़ थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में औसत राजस्व प्रति ग्राहक (एआरपीयू) में कमी आई है, लेकिन पिछले एक साल में प्रति ग्राहक एमवैस खर्च में 28 फीसदी का इजाफा हुआ है और यह एआरपीयू का 27 प्रतिशत है।
दिसंबर, 2011 में जीएसएम सेवाओं के लिए एआरपीयू 96 रुपये था, जबकि सीडीएमए सेवाओं के लिए यह 73 रुपये था। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाइस सेवाओं पर निर्भरता घट रही है और औसत राजस्व प्रति ग्राहक बढ़ाने के लिए एमवैस सेवाओं पर जोर दिया जाना चाहिए।
फिलहाल मोबाइल वैस बाजार में रिंगटोन की हिस्सेदारी 27 फीसद की है। वहीं एसएमएस आधारित एप्लिकेशंस का हिस्सा 17 प्रतिशत, मोबाइल एप्लिकेशंस का 10 प्रतिशत तथा गेम्स का 8 प्रतिशत है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आगामी सालों में जहां एआरपीयू में 5 से 8 प्रतिशत का इजाफा होगा, वहीं इसमें वॉइस सेवाओं का योगदान घटेगा तथा डाटा सेवाओं की बड़ी हिस्सेदारी होगी।
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