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होजरी उद्योग के मजदूरों का मेहनताना बढ़ा
कानपुर, एजेंसी
First Published:29-05-10 04:39 PM
Last Updated:29-05-10 05:02 PM
होजरी उद्योग से जुड़े मजदूरों के मेहनताना बढ़ाने की मांग को मान लिया गया है। होजरी उद्योग के मजदूर लगभग पिछले एक माह से अपने मेहनतान में बढ़ोतरी को लेकर आन्दोलनरत थे। होजरी उद्योग से जुडे व्यापारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें नई सिलाई मशीनें खरीदने के लिये सरकार से सहायता दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
मेहनताने में बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर शहर के 200 करोड़ रूपये के होजरी उद्योग में लगे करीब 10 हजार मजदूर पिछले एक महीने से कार्य बहिष्कार कर रहे थे। होजरी कंपनी के मालिकों की मानें तो हड़ताल से उद्योग को करोड़ों रूपये का नुकसान हो चुका है।
उत्तर प्रदेश होजरी मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के संरक्षक और प्रसिद्ध होजरी निर्माता बलराम नरूला ने आज भाषा को बताया कि मजदूरों और होजरी उद्योग के मालिकों का समझौता हो चुका है और मजदूर काम पर वापस लौट रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मजदूरों की मजदूरी में प्रति दर्जन बनियान की सिलाई में तीन रूपये से साढ़े तीन रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी गयी है। पहले मजदूरों को प्रति दर्जन बनियान की सिलाई के लिये 26 रुपये मिलते थे जो अब बढ़कर 29 रुपये और 29 रुपये पचास पैसे हो गये है। इसी तरह अंडरवियर की सिलाई, अंडर गारमेंट की सिलाई, कटाई और उनकी पैकिंग तथा प्रेस आदि के लिए भी मजदूरी बढ़ा दी गयी है और अब मजदूरों में मंहगाई को लेकर कोई आक्रोश नहीं है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के तिरूपुर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बाद होजरी अंडर गारमेंट उद्योग में उत्तर प्रदेश के कानपुर का तीसरा स्थान है। यहां होजरी की विभिन्न उत्पादन (बनियान और अंडरवियर बनाने वाली) प्रक्रिया में छोटी बड़ी करीब 500 इकाइयां काम कर रही है, जबकि सिलाई और अन्य छोटे—मोटे कामों के लिये करीब इतने ही लघु उद्योग की इकाइयां अलग है। औद्योगिक शहर कानपुर में 200 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार वाली करीब 500 होजरी इकाइयां हैं। भारतीय होजरी मजदूर संघ के महामंत्री मनीराम अग्रवाल कहते हैं कि इस उद्योग में कई स्तर पर मजदूर काम करते है। इसमें सिलाई का काम करने वाले मजदूर, धुलाई का काम करने वाले मजदूर सब अलग अलग होते हैं और इन्हें मजदूरी प्रति पीस के हिसाब से दी जाती है। मजदूरी आदि मिला कर एक मजदूर औसतन प्रति माह चार से पांच हजार एपये कमा लेता है। मजदूरों के प्रति पीस हिसाब से मेहनताना हर तीसरे साल बढ़ता है लेकिन इस मंहगाई में इस मजदूरी से खर्चा पूरा नहीं होता है ।
होजरी मजदूरों की मांग थी कि उनके मेहनताने में 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाए। मजदूर अपनी इस मांग को लेकर पिछले करीब एक माह से काम का बहिष्कार कर रहे थे।
मेहनताने में बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर शहर के 200 करोड़ रूपये के होजरी उद्योग में लगे करीब 10 हजार मजदूर पिछले एक महीने से कार्य बहिष्कार कर रहे थे। होजरी कंपनी के मालिकों की मानें तो हड़ताल से उद्योग को करोड़ों रूपये का नुकसान हो चुका है।
उन्होंने बताया कि मजदूरों की मजदूरी में प्रति दर्जन बनियान की सिलाई में तीन रूपये से साढ़े तीन रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी गयी है। पहले मजदूरों को प्रति दर्जन बनियान की सिलाई के लिये 26 रुपये मिलते थे जो अब बढ़कर 29 रुपये और 29 रुपये पचास पैसे हो गये है। इसी तरह अंडरवियर की सिलाई, अंडर गारमेंट की सिलाई, कटाई और उनकी पैकिंग तथा प्रेस आदि के लिए भी मजदूरी बढ़ा दी गयी है और अब मजदूरों में मंहगाई को लेकर कोई आक्रोश नहीं है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के तिरूपुर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बाद होजरी अंडर गारमेंट उद्योग में उत्तर प्रदेश के कानपुर का तीसरा स्थान है। यहां होजरी की विभिन्न उत्पादन (बनियान और अंडरवियर बनाने वाली) प्रक्रिया में छोटी बड़ी करीब 500 इकाइयां काम कर रही है, जबकि सिलाई और अन्य छोटे—मोटे कामों के लिये करीब इतने ही लघु उद्योग की इकाइयां अलग है। औद्योगिक शहर कानपुर में 200 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार वाली करीब 500 होजरी इकाइयां हैं। भारतीय होजरी मजदूर संघ के महामंत्री मनीराम अग्रवाल कहते हैं कि इस उद्योग में कई स्तर पर मजदूर काम करते है। इसमें सिलाई का काम करने वाले मजदूर, धुलाई का काम करने वाले मजदूर सब अलग अलग होते हैं और इन्हें मजदूरी प्रति पीस के हिसाब से दी जाती है। मजदूरी आदि मिला कर एक मजदूर औसतन प्रति माह चार से पांच हजार एपये कमा लेता है। मजदूरों के प्रति पीस हिसाब से मेहनताना हर तीसरे साल बढ़ता है लेकिन इस मंहगाई में इस मजदूरी से खर्चा पूरा नहीं होता है ।
होजरी मजदूरों की मांग थी कि उनके मेहनताने में 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाए। मजदूर अपनी इस मांग को लेकर पिछले करीब एक माह से काम का बहिष्कार कर रहे थे।
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