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S&P ने की भारत की रेटिंग नकारात्मक
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:25-04-12 03:14 PMLast Updated:25-04-12 03:29 PM
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वैश्विक साख निर्धारण एजेंसी स्टैण्डर्ड एण्ड पूअर्स (एस एण्ड पी) ने बुधवार को भारत की रेटिंग घटाकर नकारात्मक कर दी और अगले दो साल में राजकोषीय स्थिति तथा राजनीतिक परिदृश्य में सुधार नहीं हुआ तो इसे और कम करने की चेतावनी दी है।
  
एस एण्ड पी ने भारत का वित्तीय परिदृश्य बीबीबी प्लस (स्थिर) से घटाकर बीबीबी नकारात्मक (स्थिर नहीं) कर दिया। रेटिंग कम होने से भारतीय कंपनियों के लिये विदेशों से वाणिज्यिक रिण जुटाना अधिक खर्चीला हो जायेगा। पूंजी बाजार पर भी इसका असर होगा।
  
एस एण्ड पी के क्रेडिट विश्लेषक ताकाहीरा आगावा ने एक वक्तव्य में कहा आर्थिक परिदृश्य में बदलाव के पीछे तीन में से एक की संभावना की हमारी सोच ने काम किया है। इसमें यदि बाहय मोर्चे पर स्थिति लगातार बिगड़ती है, आर्थिक वद्धि की संभावनायें समाप्त होतीं हैं अथवा कमजोर राजनीतिक समन्वय में वित्तीय सुधारों के मोर्चे पर स्थिति ढीली बनी रहती है।
  
एस एण्ड पी की बीबीबी नकारात्मक निवेश के मामले में सबसे निचली रेटिंग है। एसएमसी ग्लोबल सिक्युरिटीज के अनुसंधान रणनीतिक प्रमुख एम़ जगन्नाथम थुनुंगुटला ने इस पर टिप्पणी करते हुये कहा भारत की यह नई साख रेटिंग जंक बॉंड रेटिंग के दर्जे से मात्र एक कदम दूर है, हमें लगता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि की कहानी अब समाप्ति के नजदीक है।
  
रेटिंग एजेंसी ने आगे कहा है भारत की नकारात्मक रेटिंग परिदृश्य अगले 24 महीने के दौरान और कम हो सकता है। एजेंसी ने कहा है यदि भारत के आर्थिक परिदृश्य में सुधार नहीं होता है, विदेशी मोर्चे पर स्थिति और बिगड़ती है और यदि यहां राजनीतिक परिवेश बिगड़ता है तथा राजकोषीय सुधारों की गति धीमी पड़ती है, तो रेटिंग और कम हो सकती है।  

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल में एस एण्ड पी के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में भारत की रेटिंग बढ़ाने पर जोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद एजेंसी ने रेटिंग परिदृश्य घटा दिया।
  
हालांकि, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने एस एण्ड पी की रेटिंग कम करने के फैसले पर तुरंत दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा इसमें घबराने की कोई बात नहीं, हमें पूरा विश्वास है कि इन समस्याओं से पार पा लेंगे। उन्होंने कहा कि बजट में अनुमानित आर्थिक वृद्धि को हासिल कर लिया जायेगा।
  
एस एण्ड पी ने कहा है कि हालांकि, भारत की वास्तविक प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि वर्ष 2012-13 में 5.3 प्रतिशत पर कुछ नरमी के साथ मजबूत बनी रहेगी, क्योंकि पिछले पांच सालों में इसमें औसतन 6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
  
एजेंसी ने कहा है कि भारत की अनुकूल दीर्घकालिक आर्थिक वद्धि संभावनायें और उच्चस्तर का विदेशी मुद्रा भंडार इसकी रेटिंग को समर्थन देता है। इसके विपरीत भारत का उंचा राजकोषीय घाटा और भारी कर्ज इसकी साख रेटिंग के समक्ष सबसे बड़ी एकावट है। एजेंसी का कहना है कि मई 2014 में होने वाले आम चुनाव और मौजूदा राजनीतिक पेचीदगियों को देखते हुये उसे वित्तीय और सार्वजनिक क्षेत्र में मामूली सुधारों की उम्मीद है।
  
एजेंसी ने जिन सुधारों की बात की है उनमें पेट्रोलियम पदार्थों और उर्वरक पर सब्सिडी कम करने, वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) पर अमल करना और बैंकिंग, बीमा और खुदरा क्षेत्र में विदेशी मालिकाना हक दिये जाने पर प्रतिबंधों में ढील देना शामिल है।
  
एसएण्डपी ने दूसरी तरफ यह भी कहा है कि यदि सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने और निवेश परिवेश में सुधार के उपाय करती है तो रेटिंग परिदृश्य में स्थिरता आ सकती है।
 
 
 
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