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सीआरआर में एक फीसदी कटौती की उम्मीद: चौधरी
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:07-01-13 05:27 PMLast Updated:07-01-13 06:29 PM
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भारतीय स्टेट बैंक को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये मौद्रिक नीति की आगामी तिमाही समीक्षा में रेपो दर में आधा प्रतिशत और बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में आधा से लेकर एक प्रतिशत तक कटौती करेगा।

स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा कि हमें रेपो में आधा प्रतिशत और सीआरआर  में आधा से लेकर एक प्रतिशत तक कटौती की उम्मीद है, तभी ब्याज दरों में कमी का माहौल बनेगा। रपो वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक प्रतिभूतियां ले कर बैंकों को फौरी जरूरत के लिए नकद पैसा उधार देता है इसी तरह सीआरआर वाणिज्यिक बैंकों में जमा धन का वह हिस्सा जो उन्हें रिजर्व बैंक में नकदी के रूप में रखा होता है।

चौधरी ने कहा कि हालांकि मौद्रिक नीति के बारे में कोई भी निर्णय लेना रिजर्व बैंक के अधिकार क्षेत्र में है, यह हमारी उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही है। रिजर्व बैंक ने दूसरी तिमाही समीक्षा में आर्थिक वृद्धि का अनुमान पहले के 6.5 प्रतिशत से घटाकर 5.8 प्रतिशत कर दिया। सरकार ने भी चालू वित्त वर्ष के दौरान व्यावसायिक गतिविधियों में आई सुस्ती को देखते हुये आर्थिक वृद्धि का अनुमान कम करके 5.7 से लेकर 5.9 प्रतिशत के दायरे में कर दिया।

रिजर्व बैंक ने ऊंची मुद्रास्फीति के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल 2012 के बाद से रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, सीआरआर दर में जून और सितंबर में हुई मध्य तिमाही समीक्षा के दौरान चौथाई-चौथाई फीसदी की कटौती की गई।

फिलहाल रेपो दर अप्रैल 2012 से ही जहां 8 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 7 प्रतिशत पर स्थिर है, वहीं सीआरआर इस दौरान 4.75 प्रतिशत से घटकर 4.25 प्रतिशत पर है। उद्योग जगत ऊंची ब्याज दरों से राहत पाने के लिये रेपो दर में कटौती की मांग करता रहा है। रिजर्व बैंक मौद्रिक एवं ऋण नीति की तिमाही समीक्षा 29 जनवरी को करेगा।

 
 
 
 
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