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जल्द जारी होंगे नए बैंक लाइसेंसों के लिए दिशा-निर्देश
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:06-01-13 05:59 PM
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रिजर्व बैंक नई कंपनियों को बैंक लाइसेंस देने के लिए अंतिम दिशा-निर्देश एक-डेढ़ महीने में जारी कर सकता है। इस तरह के संकेतों को देखते हुए नए बैंक खोलने के इच्छुक रिलायंस, रेलीगेयर और एलएंडटी जैसे समूहों ने जमीनी कर्रवाई भी शुरू कर दी है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक नए बैंक लाइसेंसों के लिए अपना अंतिम दिशा-निर्देश जनवरी के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत तक जारी कर सकता है। वित्त मंत्रालय इस समय रिजर्व बैंक को अपनी अंतिम टिप्पणियां भेजने की प्रक्रिया में है।

मंत्रालय इस मामले में रिजर्व बैंक द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मसौदे पर अपनी टिप्पणी भेज रहा है जिसके बाद अंतिम दिशा-निर्देशों की घोषणा की जानी चाहिए। सूत्रों ने कहा कि रिजर्व बैंक में बैंकिंग परिचालन एवं विकास विभाग के प्रभारी डिप्टी गवर्नर आनंद सिन्हा अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं और आरबीआई को उनकी सेवानिवृत्ति से पहले नियमों को अंतिम रूप दे देना चाहिए।

अनिल अंबानी की अगुवाई वाला रिलायंस समूह, वित्तीय क्षेत्र की दिग्गज रेलीगेयर और श्रीराम ग्रुप, अभियांत्रिकी क्षेत्र के एलएंडटी समूह और आदित्य बिड़ला समूह सरीखे कई बड़े उद्योग घराने बैंकिंग कारोबार में उतरने के इच्छुक हैं। उद्योग सूत्रों ने कहा कि इनमें से ज्यादातर उद्योग समूहों ने जमीनी कार्रवाई शुरू भी कर दी है और कुछ उद्योग समूहों को भरोसा है कि वे नियामकीय रूपरेखा को पूरा कर लेंगे।

पिछले सप्ताह, प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबल पुरस्कार विजेता जोसफ स्टिगलित्ज ने कहा कि कारपोरेट जगत को बैंकिंग क्षेत्र में उतरने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि इससे उनके बीच हितों का टकराव पैदा हो सकता है।

हालांकि, भारत में विशेषज्ञ इस तरह की चिंताओं को खारिज करते हैं और उनका कहना है कि बैंक लाइसेंस उन लोगों को दिए जाने चाहिए जो उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करें और नकदी का प्रवाह सुनिश्चित करें, भले ही वे चाहे उद्योग घराने हों या कोई और। प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं फिक्की के पूर्व महासचिव राजीव कुमार का मानना है कि मजबूत नियामकीय रूपरेखा हितों के टकराव के मुद्दों से निपट सकती है।

 
 
 
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