सोमवार, 24 नवम्बर, 2014 | 17:47 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    हितों के टकराव को लेकर श्रीनिवासन जवाबदेह :सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर चुनाव : पहले चरण में कल होगा मतदान  पार्टियों ने वोटरों को लुभाने के लिए किया रेडियो का इस्तेमाल सांसद बनने के बाद छोड़ दिया अभिनय : ईरानी  सरकार और संसद में बैठे लोग मिलकर देश आगे बढाएं :मोदी ग्लोबल वॉर्मिंग से गरीबी की लड़ाई पड़ सकती है कमजोर: विश्व बैंक सोयूज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना  वरिष्ठ नेता मुरली देवड़ा का निधन, मोदी ने जताया शोक  छह साल बाद पाक के पास होंगे 200 एटमी हथियार अलग विदर्भ के लिए गडकरी ने कांग्रेस से समर्थन मांगा
दूरसंचार बाजार में दूसरे नंबर पर भारत: मनमोहन
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:13-12-12 02:03 PM
Image Loading

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बडा़ दूरसंचार बाजार बन चुका है, लेकिन अभी भी ग्रामीण शहरी दूरसंचार घनत्व में भारी अंतर को पाटने की दिशा में काम करने और किफायती दर पर ब्रांडबैंड सेवा उपलब्ध कराने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने दूरसंचार विभाग और भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (फिक्की) द्वारा आयोजित इंडिया टेलीकॉम 2012 का शुभारंभ करते हुए कहा कि भारत वाहन खरीदने के क्षेत्र में प्रमुख देश बन चुका है और यहां ऑटोमोबाइल उद्योग सशक्त होकर उभरा है। इसका अनुसरण दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भी करना चाहिए।

टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक सनिर्माण के क्षेत्र में देश को अग्रणी बनाने की आवश्यकता जताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जिससे यह प्रमुख हार्डवेयर उत्पादक बन सके। उनकी सरकार इसके लिए हरसंभव मदद करने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्रांति से देश के विकास में गति आई है। घरेलू स्तर पर टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता को मजबूत बनाने की जरूरत है। इसको ध्यान में रख कर नई टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स नीति बनाई गई है। अब निजी क्षेत्र को इस दिशा में आगे आने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में दूरसंचार क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। देश में अभी करीब 96.5 करोड़ टेलीफोन कनेक्शन हैं और यह दुनिया का दूसरा सबसे बडा़ दूरसंचार बाजार बन चुका है। दूरसंचार क्षेत्र ने देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी संस्थागत निवेश का प्रवाह भी बढा़या है और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी महती भागीदारी है।

उन्होंने कहा कि हालांकि, पिछले कुछ महीने से यह क्षेत्र कई प्रकार की चुनौतियां का सामना कर रहा है, लेकिन यह कठिन समय शीघ्र ही समाप्त होने वाला है। पिछले एक वर्ष में सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र को आगे बढाने के दिशा में कई कदम उठाए हैं। नई दूरसंचार नीति 2012 घोषित की गई है। कई जटिल मामलों पर नीतियों में स्पष्टता लाई गई है। सरकार ने स्पेक्ट्रम की उपलब्धता के साथ ही इसे पारदर्शी तरीके से आवंटित करने का प्रयास किया है। उन्हें उम्मीद है कि इससे निवेशकों की चितांए दूर होंगी और देश में दूरसंचार क्षेत्र में विकास को नई दिशा मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र का शहरी क्षेत्रों की मांग के बल पर भारी वृद्धि हुई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इसकी पहुंच कम है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर टेलीफोन का उपयोग शुरू नहीं होगा, तब तक इस क्षेत्र का पूरी गति से विकास नहीं हो पाएगा। अभी शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार घनत्व 169 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्र 41 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में 59 प्रतिशत लोग टेलीफोन का उपयोग नहीं कर रहे और उसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछडा़ समुदाय मुख्य रूप से शामिल है।

 
 
 
टिप्पणियाँ