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योजनाओं का लाभ मुसलमानों तक पहुंचे: आयोग
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:25-12-12 10:04 PM
Last Updated:25-12-12 10:05 PM
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योजना आयोग ने देश के मुस्लिम समुदाय से भेदभाव की धारणा को लेकर चिंता जताई है। 12वीं योजना के दस्तावेज में अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए नवोन्मेषी कदम उठाने की जोरदार वकालत की गई है।

योजना दस्तावेज में कहा गया है कि मुस्लिमों की आबादी वाले गांवों और कस्बों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए नवोन्मेषी कदमों की जरुरत है।

इसमें कहा गया है कि मुसलमान समुदाय के सिर्फ कुछ ही लोगों को सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का लाभ मिल पाता है। दस्तावेज में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चिंता भेदभाव और विरक्ति की अवधारणा है। इसे 12वीं योजना में उचित तरीके से दूर करने की जरुरत है।

देश की कुल आबादी में मुस्लिमों की संख्या 13.4 प्रतिशत है। यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है। लेकिन आर्थिक, स्वास्थ्य और शिक्षा के मानक पर यह अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से काफी पीछे है।

एक ताजा अनुमान के अनुसार, दस्तावेज में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में मुसलमानों में गरीबी की दर 33.9 प्रतिशत है। खासकर उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उनकी गरीबी की दर ऊंची है।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मुसलमानों में गरीबी का आंकड़ा असम, पश्चिम बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों में काफी ऊंचा है। दस्तावेज में कहा गया है कि अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की तुलना में मुसलमानों में साक्षरता और कार्य में भागीदारी का आंकड़ा काफी नीचा है। इसमें कहा गया है कि ज्यादातर मुसलमान परंपरागत और कम आमदनी वाले पेशे से जुड़े हुए हैं। या फिर वे सीमांत किसान, भूमिहीन कृषि श्रमिक, छोटे व्यापारी और कारीगर हैं।

 
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