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मालदीव हवाईअड्डे पर मालदीव की सरकारी कंपनी ने कब्जा किया
माले, एजेंसी First Published:08-12-12 08:43 PMLast Updated:08-12-12 11:34 PM
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माले अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का परिचालन भारतीय कंपनी जीएमआर को सौंपने के दो साल बाद एक बार फिर मालदीव की सरकारी कंपनी एमएसीएल ने शनिवार को इसका जिम्मा संभाल लिया।

मालदीव एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड (एमएसीएल) ने जीएमआर से परिचालन का अधिग्रहण किया है। तत्कालीन नशीद सरकार ने जीएमआर को इब्राहीम नासिर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निर्माण व परिचालन का 51.1 करोड डॉलर का अनुबंध 25 साल के लिए दिया था।

मालदीव की नई सरकार ने 27 नवंबर को अचानक भारतीय कंपनी का अनुबंध रद्द कर दिया और उसे एमएसीएल को हवाईअड्डे का परिचालन सौंपने के लिए सात दिसंबर तक का वक्त दिया गया। इस फैसले ने भारत को चौंका दिया।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद के प्रेस सचिव मसूद इमाद ने कहा कि हवाईअड्डे का परिचालन अब एमएसीएल कर रहा है। सुपुर्दगी आसानी और बिना किसी मुश्किल के हुई। हालांकि यहां छपी खबरों के मुताबिक जीएमआर के अधिकारी यहां कल देर रात हुए सुपुर्दगी समारोह में मौजूद नहीं थे।

इमाद ने कहा कि तीन महीने की परिवर्तन अवधि में जीएमआर और एमएसीएल मिलकर काम करेंगे। उन्होंने किसी की नौकरी जाने या कर्मचारियों के प्रति कोई दुर्भावना की आशंका को खारिज किया। इमाद ने कहा हवाईअड्डे के सभी कर्मचारी जो जीएमआर के छोड़ जाने के बाद काम करना चाहते हैं उन्हें एमएसीएल रखेगी।

इनमें भारतीय कर्मचारी भी शामिल होंगे। फिलहाल 1,663 कर्मचारी काम कर रहे हैं जिनमें 110 भारतीय कर्मचारी हैं। मालदीव के रक्षा मंत्री और कार्यवाहक परिवहन मंत्री मोहम्मद नाजिम ने इस समारोह में कहा कि एमएसीएल के प्रबंधन में भारी फेर-बदल होगा।

यहां के समचारपत्र हवीरू में उनके हवाले से कहा मैं कहना चाहूंगा कि हम एमएसीएल के प्रबंधन का पुनर्गठन करेंगे और कंपनी को और मजबूत करेंगे।
 उन्होंने कहा हम यह स्वीकार करते हैं कि जीएमआर ने हवाईअड्डे के विकास के लिए काम किया था। हम इसके लिए जीएमआर का धन्यवाद करते हैं।

हवाईअड्डे को मालदीव की कंपनी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में लेने का काम सिंगापुर के उच्चतम न्यायालय के मालदीव के पक्ष में फैसला देने के एक दिन बाद हुआ। इस फैसले में कहा गया मालदीव सरकार के पास वह सब करने का अधिकार है जो वह चाहती है जिसमें मालिकाना हक लेना भी शामिल है।

इससे जीएमआर को बड़ा झटका लगा। इससे पहले सिंगापुर उच्च न्यायालय ने कंपनी को अस्थाई राहत देते हुए अनुबंध रद्द करने पर स्थगन आदेश जारी किया था।
 इस विवादास्पद मामले में कानूनी और कूटनीतिक संबंध के तौर पर कई मोड़ आए जबकि भारत ने अनुबंध रद्द करने के एकतरफा फैसले पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और मालदीव से कहा है कि इस पहल का द्विपक्षीय संबंधों पर गलत असर होगा।

जीएमआर के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को 2010 में हवाईअड्डे के निर्माण और परिचालन का अधिकार हासिल हुआ था। समझौते पर मोहम्मद नशीद के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन फरवरी में सत्तापरिवर्तन के बाद जीएमआर के सामने मुश्किल पेश आने लगी।

राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद की अध्यक्षता वाली मौजूदा सरकार ने कहा कि इस अनुबंध पर हस्ताक्षर संदेहास्पद स्थिति में किया गए और यह अवैध है हालांकि भारतीय कंपनी ने इसका पुरजोर विरोध किया। मालदीव की सरकार पर उसके सहयोगी दलों का दबाव है।

सत्तारुढ़ गठबंधन के कुछ दक्षिण पंथी सहयोगी दलों ने माले में कई जीएमआर विरोधी रैलियां निकालीं।
 हिंद महासागर में स्थित इस द्वीपसमूह में आयोजित रैलियों के दौरान भारत विरोधी बयान भी आए। जीएमआर के हवाईअड्डा कारोबार खंड में माले हवाईअड्डा सबसे अधिक मुनाफे वाला कारोबार रहा।

कंपनी ने अब तक माले हवाईअड्डे के प्रबंधन और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करीब 25 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। भारत के दक्षिण पश्चिमी कोने की तरफ हुलहुले द्वीप स्थित मालदीव का इब्राहिम नासिर अंतरराष्ट्रीय हवाईअडडा क्षेत्र के सबसे अधिक तेजी से विकसित होता हवाईअड्डा है।

 
 
 
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