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नई औद्योगिक नीति में है मानवीय चेहरा: चव्हाण
नागपुर, एजेंसी First Published:05-01-13 03:14 PMLast Updated:05-01-13 03:25 PM
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि राज्य की नई औद्योगिक नीति मानवीय चेहरे के साथ लाई गई है। इसमें औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के जीवनस्तर सुधारने पर ध्यान दिया गया है।
  
चव्हाण ने इन आलोचनाओं को खारिज कर दिया कि यह नीति रीयल्टी कंपनियों के पक्ष में है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जरूरत होने पर सरकार इसमें बदलाव के लिए तैयार है।
   
राज्य सरकार की इसी सप्ताह पेश नीति में एकीकृत औद्योगिक क्षेत्र (आईआईए) की अवधारणा पेश की गई है। इस प्रावधान के तहत ऐसी सेज परियोजनाओं जिनकी अधिसूचना रद्द कर दी गई है, के डेवलपर्स 40 फीसदी भूमि का इस्तेमाल आवासीय तथा व्यावसायिक उद्देश्य के लिये कर सकते हैं। नई योजना के तहत ऐसे एकीकृत क्षेत्रों के लिये 27,000 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध होगी।
  
मुख्यमंत्री ने कल रात संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यदि इन नए प्रावधानों के बावजूद डेवलपर्स विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) से पीछे हटते हैं, तो सरकार कुछ नहीं कर सकती।  
  
उन्होंने कहा कि इस नीति का मानवीय चेहरा है और इसका मकसद औद्यागिक श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारना है। उन्होंने कहा कि अभी तक हम सिर्फ रोजगार सृजन की बात करते हैं, जबकि श्रमिकों को औद्योगिक क्षेत्र के आसपास स्लम में रहना पड़ता है।

 
 
 
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