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औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े निराशाजनक: प्रणब
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:12-04-12 03:18 PM
औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर के आंकड़ों को निराशाजनक बताते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इसकी मुख्य वजह सख्त मौद्रिक नीति और वैश्विक कारणों को बताया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार औद्योगिक उत्पादन में सुधार के लिए कदम उठाएंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन आंकड़ों का असर अगले सप्ताह पेश होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा में दिखाई देगा। सरकार और रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए मिलकर कदम उठाएंगे।
फरवरी माह में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 4.1 फीसदी पर आ गई है, जो एक साल पहले इसी महीने में 6.7 प्रतिशत रही थी। अप्रैल से फरवरी 2011-12 के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 3.5 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 8.1 फीसदी थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता तथा पिछले कुछ समय से मौद्रिक नीति में सख्ती की वजह से निवेश में सुधार प्रभावित हुआ है।
रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा 17 अप्रैल को पेश करने जा रहा है। जनवरी, 2012 के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े को संशोधित कर 6.8 से 1.14 फीसदी किए जाने को निराशाजनक बताते हुए मुखर्जी ने कहा कि 2011-12 की अंतिम तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति में सुधार उतना नहीं हुआ, जैसी उम्मीद थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन आंकड़ों का असर अगले सप्ताह पेश होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा में दिखाई देगा। सरकार और रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए मिलकर कदम उठाएंगे।
फरवरी माह में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 4.1 फीसदी पर आ गई है, जो एक साल पहले इसी महीने में 6.7 प्रतिशत रही थी। अप्रैल से फरवरी 2011-12 के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 3.5 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 8.1 फीसदी थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता तथा पिछले कुछ समय से मौद्रिक नीति में सख्ती की वजह से निवेश में सुधार प्रभावित हुआ है।
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टिप्पणियाँ
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मंत्रीजी आप अपने द्वारा लागू की गई नए नए टैक्स व्यवस्थाओं को देखिये और ऐसे राजनेताओं/चुनाव लड़ने वालों की फेहरिस्त देखिये जो कोई उद्योग नहीं लगाये हुए है परन्तु उनकी आय कहाँ से आई जो साल दर साल कई गुना बढ़कर आय कर के आंकड़े चुनाव आयोग के दिशानिर्देशानुसार चुनाव लड़ने के समय दिए जाते है और चुनावों मै अनापशनाप खच करते है आप उन व्यापारिओं को देखिये जो अपना सबकुछ लगाकर उद्योग/व्यापार करने के बाद सरकारी मशीनरी को खुश करके टैक्स देकर देश की सेवा करते है और सरकारी नौकर उन्हें चोर का दर्जा देते है जिनके बदौलत वे ऐश करते है और सरकारी kosh जो टैक्स द्वारा उन्हें तनखाह देता है |आप यदि देश के लिए कुछ करने चाहते है तो पहले चाणक्य नीत पढ़िए की दूसरों को बताने के पूर्व स्वयं करके दिखाएँ की राजा को प्रजा पर कितना टैक्स लगाना चाहिए और अपना आचरण kaisa हो ] गिरावट का कारन सरकारी नीत हे समझ आती है साथ ही वैश्विक कारण भी है ]
By vijay (12th-April-2012 06:05:PM)
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