मिलों से खरीदी जाने वाली चीनी की कीमत बढ़ा सकती है सरकार
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:08-01-13 12:45 PM
Last Updated:08-01-13 01:15 PM
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सरकार राशन की दुकानों के जरिये बेचने के लिये मिलों से खरीदी जाने वाली चीनी की कीमत (लेवी मूल्य) चालू वर्ष के लिये करीब दो रुपये से अधिक बढ़ाकर करीब 22 रुपये प्रति किलो कर सकती है। 
     
विपणन वर्ष 2011-12 (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी का लेवी मूल्य 19.04 रुपये किलो था। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने पिछले साल के मुकाबले चीनी की लेवी कीमत में 2 रुपये प्रति किलो से अधिक की वृद्धि का प्रस्ताव किया है।
     
अधिकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। लेवी कीमत बढ़ने से 400-500 करोड़ रुपये की सब्सिडी बढ़ेगी। चीनी क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में है। चीनी मिलों को सस्ते गल्ले की दुकानों से बिकने वाली चीनी के लिये अपने कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत हिस्सा सरकार को बेचना होता है। 
     
लेवी कीमत का आकलन उचित और लाभदायक मूल्य (एफआरपी) के आधार पर किया जाता है। विपणन वर्ष 2012-13 के लिये एफआरपी 170 रुपये प्रति क्विंटल था।
     
सरकार बाजार भाव से कम मूल्य पर चीनी खरीदती है और राशन की दुकानों के जरिये 13.50 रुपये प्रति किलो बेचती है। सरकार हर साल गरीबों को राशन की दुकानों के जरिये 27 लाख टन चीनी बेचती है। अधिकारी ने कहा कि चीन की लेवी कीमत हर साल बढ़ रही है लेकिन खुदरा मूल्य 2002 से समान है।
     
सरकार ने चालू वर्ष में चीनी का उत्पादन 2.3 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है जबकि पिछले साल 2.6 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। घरेलू मांग 2.1 से 2.2 करोड़ टन रहने का अनुमान है और इस लिहाज से उत्पादन पर्याप्त है।
     
अधिकारी ने कहा कि सरकार अगले महीने गन्ना उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान के आधार पर चीनी उत्पादन के अनुमान को संशोधित कर सकती है। 

 
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