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बिगड सकते हैं आर्थिक हालात: एसोचैम
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:02-12-2012 09:46:19 PMLast Updated:02-12-2012 11:29:56 PM
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देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर में लगातार आ रही गिरावट के बीच कारोबारी जगत को अभी हालात और बिगडने की चिंता सताने लगी है।

उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने भारतीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण पर आधारित रिपोर्ट में कहा है कि चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में हालात बेहतर हो सकते हैं, लेकिन उसके पहले घरेलू और वैश्विक वजहों से अर्थव्यवस्था की मुश्किलें काफी बढ सकती हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 76 फीसदी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और मुख्य वित्त अधिकारियों ने कहा कि ऊंची ब्याज दरों, बढ़ती महंगाई और कई यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था में गिरावट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पडे़गा। उनका मानना है कि ऐसा होने पर भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात और भी खराब हो सकते हैं।

लेकिन चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में निर्यात बढने से हालात कुछ संभलने की उम्मीद भी है। खास तौर पर मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में विदेशी निवेश को मंजूरी देने के फैसले पर संसद में चर्चा कराने के लिए सहमति बन जाने से इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे बढने की उम्मीद जगी है।

इसके बावजूद इन कंपनी अधिकारियों का कहना है कि इस वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर दशक के निम्नतम स्तर पांच से 5.5 फीसदी पर ही रहेगी। एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत ने कहा कि अगले छह-सात महीनों में हालात बेहतर होने के संकेत दिख रहे हैं।

मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार पर कोई सहमति बन जाने से देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। इसके अलावा एशियाई देशों को निर्यात में बढ़ोतरी होने से भी मदद मिलेगी।
 

 
 
 
 
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