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सब्सिडी सोच-समझ कर दी जाए: पवार
मुंबई, एजेंसी First Published:28-12-2012 09:09:04 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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कृषि मंत्री शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक के तहत सब्सिडी की सीमा पर दोबारा सोचने की जरूरत है क्योंकि उनकी राय में आबादी के बहुत बड़े हिस्से को बहुत अधिक सस्ता अनाज देने से उल्टे देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

यह विधेयक सत्तारूढ संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रिय परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। पवार ने कहा कि इस विधेयक के तहत बहुत अधिक लोगों को बहुत अधिक सब्सिडी दी गयी तो अनाज के भाव कम होंगे और किसान उसकी खेती बंद कर देंगे।

पवार ने यहां अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद पार्टी कार्यकाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिये कि देश की 70 प्रतिशत आबादी को रियायत देना क्या जरूरी है।

उन्होंने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन बड़ी हकीकत को भी ध्यान रखा जाना चाहिये। इस कार्यालय का जीर्णोंद्धार किया गया है।

पवार ने कहा कि अब हम खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने जा रहे हैं। खाद्यान्न हर किसी की जरुरत है तथा इस बात में कोई शक नहीं है। हालांकि हम गेहूं 18 रुपए प्रति किग्रा की दर से खरीदते हैं और लगभग 68 फीसदी आबादी को इसे दो रुपए प्रति किग्रा की दर पर देने की इच्छा कर रहे हैं।

पवार ने कहा कि मुझे केवल एक बात कहनी है। अगर लागत 18 रुपए की आती है तो 50 प्रतिशत या 75 प्रतिशत की सब्सिडी दे दीजिये। पर मेरी चिंता कुछ और है। जब देश की 70 फीसदी आबादी को बाजार में गेहूं दो रुपए की दर पर मिलता है, यह बढ़त अच्छी बात है, पर उस किसान का क्या होगा जो उसका उत्पादन करता है। उसे कौन उसके उत्पाद का लाभकारी मूल्य देगा जबकि वही माल बाजार में इतने सस्ते दर पर उपलब्ध है।

पवार ने कहा कि मेरा मानना है कि (किसान के उत्पाद की) कीमत कम होगी। अगर ऐसा होता है तो वह किसान उसे छोड़ दूसरी फसल की खेती की ओर रुख करेगा। और अगर वह ऐसा करता है तो तो देश में खाद्य सुरक्षा की समस्या गंभीर हो जायेगी।

पवार ने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने के चक्कर में ऐसी अति नहीं की जानी कि सब कुछ स्वाहा हो जाये। राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषण का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की संख्या में प्रति वर्ष दो प्रतिशत से गिरावट आने का जिक्र था।

उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों की संख्या घट रही है लेकिन हमारी रियायतें बढ़ रही हैं। पवार ने कहा कि आज महाराष्ट्र में जो भी लोग महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में काम कर रहे हैं उन्हें 145 रुपए प्रति दिन की दिहाड़ी मिलती है। अगर वह आदमी दो रुपए प्रति किग्रा की दर से अपना 35 किग्रा का महीने का स्टाक खरीदता है तो वह अपने महीने का स्टाक 70 रुपए में खरीदता है तो वह 140 रुपए में (एक दिन की दिहाड़ी में) दो महीने का स्टाक खरीद लेगा।

उन्होंने कहा कि किसी ऐसे आदमी को सारी रियायत दें जिसके पास खाने को कुछ न हो लेकिन पूरे देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी को रियायत देना क्या जरूरी है। उन्होंने कहा कि कमजोर तबके, दलितों और अल्पसंख्यकों के लिए भिन्न रुख अख्तियार करने में कुछ भी गलत नहीं है।

 
 
 
 
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