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टाटा की मिस्त्री को सलाह, अपने फैसले खुद करो
मुंबई, एजेंसी First Published:14-12-2012 01:30:31 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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टाटा घराने के पर्याय रहे रतन टाटा की अपने उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री को सीधी सरल सलाह है—अपने फैसले खुद करो। रतन टाटा दो सप्ताह बाद ही 100 अरब डॉलर के टाटा घराने के प्रमुख पद से हट रहे हैं और मिस्त्री उनकी जगह लेंगे।

टाटा ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि उनके सेवानिवृत्त होने के बाद उनके आभा मंडल का असर उनके उत्तराधिकारी पर रहेगा। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि किसी पर अपना असर या अपनी छाया कायम रखना सही होगा।

रतन टाटा 28 दिसंबर को 75 साल की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके उत्तराधिकारी मिस्त्री उनसे 31 साल छोटे हैं। टाटा की मिस्त्री को सलाह है, आप अपने फैसले खुद करें और आपको वही फैसले करने चाहिए जो आप करना चाहते हैं।

टाटा ने बांबे हाउस में अपने कार्यालय में विशेष साक्षात्कार में टाटा ग्रुप के साथ बीते अपने 50 सालों के बारे में बात की। इनमें से 21 साल वे टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे हैं। उन्होंने इस दौरान की उपलब्धियों और विफलताओं की चर्चा की और सेवानिवृत्ति के बाद की योजनाओं पर भी बात की।

टाटा से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने मिस्त्री को सफलता का कोई मंत्र दिया है उनका कहना था, नहीं, मैंने उन्हें वही बात कही जो मैंने जेआरडी से कमान संभालते समय खुद से कही थी। किसी की भी पहली प्रतिक्रिया जेआरडी टाटा बनने की थी क्योंकि आप उनके पदचिन्हों पर चल रहे हैं। मैंने तत्काल खुद से कहा कि मैं कभी भी ऐसा नहीं कर सकता। मैं उनकी कितनी भी नकल करने की कोशिश करूं वैसा नहीं बन सकता। इसलिए मैंने खुद जैसा ही बनने और जो मुझे सही लगे वही करने का फैसला किया। यही मैंने साइरस को बताया है।

मिस्त्री इस समय टाटा ग्रुप में वाइस चेयरमैन हैं और वे टाटा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि इस शीर्ष स्तर पर इस बदलाव को सुचारू ढंग से अमली जामा पहनाया जा सकें। टाटा ग्रुप का कारोबार ऑटोमोबाइल, आईटी, होटल तथा चाय से लेकर इस्पात तक और 80 देशों में फैला है।

नेतृत्व परिवर्तन के दौर में मिस्त्री ने उनसे समय—समय पर पूछा था ये ठीक है या फिर वह ठीक है। उन्होंने कहा था कि उन्हें चीजों को इस तरह देखना चाहिए जैसे कि मैं यहां नहीं हूं क्योंकि आपको अपना फैसला कुछ करना चाहिए।

टाटा ने मिस्त्री से कहा था यदि आप मेरी राय चाहते हैं तो मैं दूंगा, लेकिन आपको खुद फैसला करना चाहिए और अपने तरीके से सोचना चाहिए और सिर्फ इस तरह सोचना चाहिए कि जो भी फैसला आप करेंगे और जो भी पहल करेंगे उसे जनता की नजर से गुजरना है।

उन्होंने कहा कि यह परीक्षा उन्होंने खुद भी दी है। उन्होंने कहा यदि यह जनता की नजर में ठीक है तो आगे बढ़ें.. लेकिन यदि यह जनता की नजर में खरा नहीं उतरता ,तो न करें।

 

 

 
 
 
 
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