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घरेलू विनिर्माण क्षमता का नहीं हो रहा इस्तेमाल
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:28-11-12 05:33 PM
Last Updated:28-11-12 05:33 PM
सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उपकरण कंपनी भेल ने कहा है कि बिजली क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं की वजह से ज्यादातर घरेलू विनिर्माण क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
भेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बीपी राव ने कहा कि भेल सहित घरेलू बिजली उपकरण बाजार 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दौरान 88,000 मेगावाट की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि भेल के पास खुद ही 20,000 मेगावाट की क्षमता है, लार्सन एंड टब्रो के पास 5,000 मेगावाट है। इसी तरह भारत फोर्ज-अल्टाम सहित अन्य संयुक्त उद्यम कंपनियों की भी क्षमताएं हैं।
राव ने कहा कि इन कंपनियों द्वारा 10,000 मेगावाट निर्माण के चरण में है, लेकिन 40,000 मेगावाट के लिए कोई बाजार नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षमताओं का कम इस्तेमाल एक प्रमुख वजह है कि जिसके कारण सरकार ने आयातित बिजली उपकरणों पर ऊंचा शुल्क लगाने का कदम उठाया है।
राव ने कहा कि सरकार को इस बात की जानकारी है कि उनके पास क्षमता
है। आयात बढ़ने से इन क्षमताओं का और इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। राव ने कहा कि घरेलू बिजली क्षेत्र को भूमि अधिग्रहण की समस्याएं, पर्यावरणीय मंजूरियों, कोष की कमी और डिस्कॉम की खराब सेहत की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने इसी साल बिजली उपकरणों के आयात पर 21 प्रतिशत का शुल्क लगाया था। सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से घरेलू कंपनियों को चीन के सस्ते आयात से बचाने के लिए उठाया।
है। आयात बढ़ने से इन क्षमताओं का और इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। राव ने कहा कि घरेलू बिजली क्षेत्र को भूमि अधिग्रहण की समस्याएं, पर्यावरणीय मंजूरियों, कोष की कमी और डिस्कॉम की खराब सेहत की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने इसी साल बिजली उपकरणों के आयात पर 21 प्रतिशत का शुल्क लगाया था। सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से घरेलू कंपनियों को चीन के सस्ते आयात से बचाने के लिए उठाया।
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