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'दस वर्षों में 50 करोड़ लोगों को घर की जरूरत'
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:06-02-12 12:32 AM
अगले दस वर्षों में शहरीकरण की रफ्तार बढ़ने की वजह से देश के शहरी इलाकों में 50 करोड़ लोगों को घरों की जरूरत पडे़गी।
उद्योग एवं वाणिज्य संघ फिक्की ने रविवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में यह अनुमान जताया। उसके मुताबिक आगामी दशक में भारत में शहरीकरण की रफ्तार जोर पकड़ने की उम्मीद है। शहरी इलाकों में लोगों के बडी़ संख्या में आने के चलते अगले 10 वर्षों में 50 करोड़ लोगों को घरों की जरूरत पडे़गी।
शहरीकरण की यह रफ्तार आगे भी जारी रहने की संभावना है। फिक्की ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2050 तक भारत की आबादी बढकर 1.7 अरब हो जाएगी और 90 करोड़ लोग शहरी इलाकों में रहने के लिए आएंगे। इन लोगों के लिए आवासीय सुविधा मुहैया कराने के लिए शहरी इलाकों में घरों के निर्माण में चौगुनी बढो़तरी करनी होगी।
लेकिन शहरी क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इतनी बडी़ तादाद में नए घरों का निर्माण फिक्की की नजर में भारत के लिए बहुत मुश्किल चुनौती होगी। इसके अलावा पानी एवं बिजली की आपूर्ति और कचरा निकासी की समुचित व्यवस्था बना पाना भी सरकार के लिए खासा मुश्किल होगा।
फिक्की ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी एजेंसियों का ध्यान मुख्य रूप से नए निर्माण पर ही होता है जबकि लंबे समय तक इनका संचालन करने और इनके रखरखाव को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उसने इस प्रवृत्ति में बदलाव लाने की भी मांग की है।
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