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मकान अभी भी देश में करोड़ों लोगों का सपना है। सपना भी इतना बड़ा है कि थोड़ा सा लाभ दिखा तो लोग कई जरूरी जानकारी करना भूल जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। कई जगह तो बिल्डर ही एक फ्लैट कई लोगों को बेच देते हैं तो कई जगह एक ही मकान लोगबाग फर्जीवाड़ा करके कई लोगों को बेच देते हैं।
लेकिन अगर सब कुछ सही चला तो यह फर्जीवाड़ा इस बजट के बाद नहीं चल पाएगा। ऐसे फजीवाड़े में बैंक का कर्ज भी फंस जाता है इसलिए बैंक ऐसी कंपनी बनाना चाहते हैं जहां मकानों का पूरा आंकड़ा रखा जा सके। इसके बाद बैंक कर्ज देने से पहले मकान के बारे में इन आंकड़ों से मिलान करेंगे। ऐसा होने से उम्मीद है कि फजीबाड़े पर रोक लग सकेगी।
बैंकों की लगातार शिकायत बढ़ती जा रही है कि लोग मकान का कर्ज लेते हैं और उसके कागजात फर्जी निकल जाते हैं या अन्य कोई कर्ज लिया जाता है और बदले में बंधक बनाया गया मकान किसी और का निकलता है या कई जगह बंधक रखा होता है। ऐसे में जहां बैंक का नुकसान होता है वहीं सही खरीदार भी परेशान होता है। इस समस्या से निपटने के लिए बैंकों ने एक सेंट्रल आवास रजिस्ट्रीज जैसी संस्था बनाने की पहल की है। उम्मीद है कि इसको बजट में जगह मिल जाएगी।
इसके तहत एक कंपनी बनाई जाएगी। यह कंपनी गैर मुनाफा कमाने वाली कंपनी होगी जिसके मालिक सभी बैंक होगे। इसके बाद जो भी लोग बैंक से मकान के लिए कर्ज मांगेंगे उनकी जानकारी को इस कंपनी के आंकड़ों से मिलाया जाएगा। अगर यह मकान पहले से कहीं और बिका हुआ नहीं दिखाया जाएगा तो कर्ज मांगने वालों को बैंक कर्ज देंगे। इससे न सिर्फ बैंकों को फायदा होगा बल्कि खरीदार को भी सही मकान मिल सकेगा।
अगर बिल्डर ने एक ही फ्लैट के कागजों में हरफेर करके एक से ज्यादा लोगों को बेचा होगा तो यह बात आसानी से पकड़ में आ जाएगी। इसके अलावा बैंक में जब लोग मकान गिरवी रख कर कर्ज मांगेंगे तो भी बैंक इसी प्रकार मकान के बारे में जानकारी कर सकेंगे। अगर कागजात में हेरफेर करके मकान को और भी कहीं गिरवी रखा गया होगा तो इसी जानकारी सेंट्रल डेटा बेस से आसानी से ली जा सकेगी।

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