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केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के अग्रिम अनुमानों के अनुसार 2009-10 में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी।
सरकार ने कृषि उत्पादन में गिरावट के बावजूद चालू वित्त वर्ष (2009-10) में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। पिछले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.7 फीसदी थी।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अग्रिम अनुमानों के अनुसार 2009-10 में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी। हालांकि सीएसओ का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के अनुमान की तुलना में कम है।
वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था की मध्यावधि समीक्षा में जीडीपी की वृद्धि दर 7.75 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में आर्थिक वद्धि दर 7.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
हालांकि यह माना जा रहा है कि अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में पहली तिमाही की तुलना में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेगी। पहली छमाही में आर्थिक वृद्धि दर सात फीसदी रही थी।
सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में कृषि और संबंधित गतिविधियों की वृद्धि दर में 0.2 फीसदी की गिरावट आएगी। पूर्व वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 1.6 फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर में विनिर्माण क्षेत्र का खास योगदान रहेगा।
सीएसओ का अनुमान है कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रहेगी, जबकि पिछले वित्त वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 3.2 फीसदी थी। वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में इस क्षेत्र को अन्य क्षेत्रों की तुलना में सरकार से प्रोत्साहनों की ज्यादा खुराक मिली है।
अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष में खनन क्षेत्र की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रहेगी। पिछले साल इस क्षेत्र की वृद्धि दर 1.6 फीसद थी। वहीं बिजली, गैस और जलापूर्ति क्षेत्र की वृद्धि दर 8.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 3.9 प्रतिशत रही थी।
व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र की वृद्धि दर 2009-10 में 8.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पूर्व वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत रही थी। सीएसओ का अनुमान है कि निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी। पिछले वित्त वर्ष में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 5.9 फीसदी रही थी।
आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में हालांकि फाइनेंसिंग, बीमा, रीयल एस्टेट और कारोबारी क्षेत्र की रफ्तार घटने की संभावना है। इन क्षेत्रों की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। जबकि पिछले वित्त वर्ष में इन क्षेत्रों की वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत रही थी।
सामुदायिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत सेवाओं की वृद्धि दर चालू वित्त में 8.2 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में इन क्षेत्रों की वृद्धि दर 13.9 प्रतिशत रही थी।

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