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इन मामलों में थोड़ा मायूस करती है होंडा डब्ल्यूआर-वी

इन मामलों में थोड़ा मायूस करती है होंडा डब्ल्यूआर-वी

होंडा, डब्ल्यूआर-वी के साथ 16 मार्च को कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में उतर रही है। इसकी शुरूआती कीमत 7 लाख रूपए के आसपास हो सकती है। cardekho.com के मुताबिक इसका मुकाबला फोर्ड ईकोस्पोर्ट, मारूति विटारा ब्रेज़ा, टीयूवी-300, नूवोस्पोर्ट, क्रॉस पोलो, फिएट अवेंच्यूरा, इटियॉस क्रॉस और आई-20 एक्टिव से होगा।

डब्ल्यूआर-वी को होंडा जैज़ वाले प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है, इस में जैज़ वाले फीचरों के अलावा कई चीजें नई होंडा सिटी से भी ली गई हैं, लेकिन मुकाबले में मौजूद इसी कीमत के आस-पास रहने वाली कारों की फीचर लिस्ट पर नज़र डालें तो लगता है कि इस में कुछ कमियां रह गई हैं। यहां हम बात करेंगे ऐसे ही कुछ फीचर्स की जिनकी कमी डब्ल्यूआर-वी में इसकी कीमत की तुलना में खलेगी...

1. ज्यादा पावरफुल इंजन
डब्ल्यूआर-वी में होंडा जैज़ वाला 1.2 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है, सिटी ड्राइव में यह बेहतर है इस में कोई शक नहीं है, लेकिन हाईवे राइड में यह आपको रोमांचित नहीं कर पाएगा। जैज़ में भी यह बात साफ महसूस होती है। डब्ल्यूआर-वी, जैज़ की तुलना में 62 किलोग्राम भारी है ऐसे में वज़न का प्रभाव इसकी परफॉर्मेंस पर पड़ना लाजिमी है।

कंपनी को चाहिये था कि वह इस में 1.2 लीटर से ज्यादा पावरफुल इंजन देती, क्योंकि मुकाबले में मौजूद कई कारों में इससे ज्यादा पावरफुल 1.5 लीटर का इंजन दिया गया है। ईकोस्पोर्ट और टोयोटा इटियॉस क्रॉस दोनों ही 4 मीटर के दायरे में आती है और इन दानों में 1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन लगा है, वहीं फिएट अवेंच्यूरा में 1.4 लीटर का टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन लगा है। ऐसे में अगर होंडा भी डब्ल्यूआर-वी में 1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन देती तो यह बाकी कारों की तरह ज्यादा पावरफुल हो सकती थी।

2. ऑटोमैटिक की सुविधा न होना
होंडा डब्ल्यूआर-वी में जैज़ वाले ही इंजन दिए गए हैं। जैज़ के पेट्रोल वर्जन में मैनुअल और सीवीटी ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है, जबकि डब्ल्यूआर-वी केवल मैनुअल गियरबॉक्स के साथ ही आएगी। ग्राहकों की रूचि ऑटोमैटिक कारों की तरफ बढ़ रही है ऐसे में होंडा को यह मौका नहीं गंवाना चाहिए था। जैज वाला ही ऑटोमैटिक गियरबॉक्स यहां दिया जा सकता था।

3. मैजिक सीटें
डब्ल्यूआर-वी का केबिन जैज़ जैसा ही है, लेकिन डब्ल्यूआर-वी में जैज़ की तरह मैजिक सीटें नहीं मिलेंगी। ये सीटें काफी फ्लेक्सिबल होती है, इन्हें पूरा या फिर कुछ हिस्सों में फोल्ड किया जा सकता है, इससे केबिन में लगेज के हिसाब से जगह बनाई जा सकती है या फिर पैसेंजर इन्हें अपने मुताबिक आगे-पीछे कर सकता है। होंडा डब्ल्यूआर को स्पोर्टी लाइफस्टाइल व्हीकल (एलएसवी) के तौर पर प्रोटेक्ट किया जा रहा है, ऐसे में अगर इस में मैजिक सीटें मिलती तो यह कंपनी के लिए फायदेमंद रहता।

4. कम ऊंचा कद
जैज़ की तुलना में डब्ल्यूआर-वी में ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस देकर होंडा ने अच्छा काम किया है, इस वजह से यह जैज़ से थोड़ी अलग नज़र आती है। इसके बावजूद कई एंगल से यह जैज़ से काफी मिलती जुलती लगती है। खासतौर पर साइड से तो यह हूबहू जैज़ जैसी लगती है। हालांकि यह बात कहीं से भी कार के विपरीत नहीं जाती है, डिजायन पसंद आना या न आना एक निजी मामला है। लेकिन इस मामले में फोर्ड की तारीफ करनी होगी कि वह ईकोस्पोर्ट को एसयूवी वाला लुक देने में कामयाब रही और लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया, दिलचस्प बात ये है कि ईकोस्पोर्ट को फिएस्टा सेडान पर बनाया गया है लेकिन फिएस्टा का एक भी बॉडी पैनल ईकोस्पोर्ट में इस्तेमाल नहीं हुआ है।     

5. चौड़े और बड़े स्पॉइलर का अभाव
स्पॉइलर हमेशा से ही होंडा कारों की पहचान रहा है, पहली जनरेशन की होंडा सिटी से लेकर जैज़ हैचबैक में कंपनी ने बड़े और चौड़े स्पॉइलर दिए हैं। ब्रियो फेसलिफ्ट और 2017 सिटी सेडान में भी स्पॉइलर मौजूद है लेकिन डब्ल्यूआर-वी में कंपनी ने स्पॉइलर नहीं दिया है, अगर होंडा चाहती तो यहां स्पॉइलर देकर वह अपनी पारंपरिक इमेज़ को बरकरार रख सकती थी।  

6. डीज़ल की तुलना में पेट्रोल वर्जन में कम फीचर होना
होंडा डब्ल्यूआर-वी दो वेरिएंट में मिलेगी, इसके टॉप पेट्रोल वेरिएंट में डीज़ल वेरिएंट की तुलना में कम फीचर दिए गए हैं। पेट्रोल वेरिएंट में वन-टच फंक्शन वाली सनरूफ, क्रूज़ कंट्रोल और पैसिव की-लैस के साथ इंजन स्टार्ट-स्टॉप बटन की सुविधा नहीं मिलेगी।

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