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मुत्तमवार के मुताबिक बंटवारे की मुखालफत हो रही है, लेकिन किसी ने यह सोचा है कि 2004 से विदर्भ में सात हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
अलग विदर्भ की मांग ने पकड़ा जोर
नागपुर
First Published:19-12-09 05:51 PM
Last Updated:21-12-09 04:08 PM
आंध्र प्रदेश में चल रही राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए अलग विदर्भ राज्य की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। वरिष्ठ कांग्रेसी सांसद विलास मुत्तमवार ने मौके को देखते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अलग विदर्भ राज्य के गठन की जरूरत को दोहराया है।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व का एक तबका बंटवारे की मांग की मुखालफत कर रहा है, लेकिन किसी ने इस बारे में सोचा है कि वर्ष 2004 से विदर्भ में सात हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इस इलाके का पिछड़ापन राज्य के विकास में बाधा डाल रहा है।
मराठी भाषा के नाम पर विदर्भ के लोगों को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने का शिवसेना पर आरोप लगाते हुए मुत्तमवार ने कहा कि विदर्भ बुनियादी रूप से हिंदी पट्टी का इलाका है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरु द्वारा केंद्रीय प्रांत और बेरार के लोगों से महाराष्ट्र में शामिल होने की अपील करने पर इसका विलय राज्य में कर दिया गया था।
मुत्तमवार ने कहा कि 'एक राज्य, एक भाषा' के फॉमूले के पीछे कोई तर्क नहीं है। आप इस बात को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं कि यहां एक से अधिक हिंदी भाषी राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और दूसरे राज्यों का अस्तित्व है।
उन्होंने कहा कि विदर्भ को कई विशेषाधिकारों से सिर्फ इसलिए वंचित रखा गया है क्योंकि यह महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य के अंतर्गत आता है।
मुत्तमवार ने कहा कि विदर्भ भी अच्छी तरह से विकास कर सकता है। यहां साढ़े छह हजार मेगावाट बिजली पैदा होती है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है।
उन्होंने कहा कि वेस्टर्न कोलफिल्ड्स महाराष्ट्र को विदर्भ के कोयले के एवज में पांच सौ करोड़ रुपए की रॉयल्टी देता है। इसके अलावा मैंग्नीज ओर कंपनी भी राज्य को लाभांश देती है। विदर्भ अपनी अधिशेष बिजली बेचकर भी अच्छा खासा राजस्व कमा सकता था।
12वें वित्त आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों के मुताबिक हर पिछड़े राज्य को आठ हजार करोड़ रुपए की सालाना आर्थिक मदद दी जाएगी। मुत्तमवार के मुताबिक वित्त आयोग के अनुदान का इस्तेमाल विदर्भ में बेहतर सड़क संपर्क, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर खर्च किया जा सकता है। भंडारा, गोंडिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिले में घने जंगल हैं। इससे प्राप्त वन उत्पाद भी राजस्व का एक अन्य स्रोत है।
उन्होंने कहा कि विदर्भ के पास विधानसभा, उच्च न्यायालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और मंत्रियों के आवास जैसी सभी जरूरी ढ़ांचागत सुविधाएं हैं। नागपुर भी देश के महत्वपूर्ण शहरों में गिना जाता है।
राज्य के राजनीतिक नेतृत्व पर मुत्तमवार ने कहा कि शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे ने वर्ष 1997 में विदर्भ के लोगों से उनके पिछड़ेपन को दो सालों के भीतर दूर करने का वादा किया था। उन्होंने तब कहा था कि अगर यह नहीं हुआ तो वह खुद आगे बढ़कर पृथक विदर्भ का गठन करेंगे।
मुत्तमवार ने कहा कि आज सात लोकसभा सदस्य और 50 विधायक विदर्भ को राज्य बनाए जाने का समर्थन कर रहे हैं। आप और क्या चाहते हैं।
हालांकि उन्होंने माना कि विदर्भ के तीन जिले नक्सल प्रभावित हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अगर अलग राज्य नहीं बनाया गया, तो नक्सली अपना नेटवर्क अगले 25 सालों में पूरे विदर्भ में फैला सकते हैं।
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