सोमवार, 21 मई, 2012 | 22:20 | IST
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  Image Loading अन्य फोटो सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने आरोप लगाया कि मायावती अपने कुशासन, भ्रष्टाचार और अक्षमता से बचाव के लिए ही छोटे राज्यों की बात कर रही हैं।
राज्यों की मांग राष्ट्र को तोड़ने की कोशिश: सपा
लखनऊ
First Published:19-12-09 05:52 PM
Last Updated:21-12-09 04:19 PM
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उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की प्रदेश को छोटे-छोटे राज्यों में बांटने की सहमति मांगने के लिए प्रधानमंत्री को लिखे पत्र पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जहां सरदार पटेल ने छोटे-छोटे राज्यों को जोड़कर एक राष्ट्र बनाया था, वहीं छोटे राज्यों की मांग कर अब उस राष्ट्र को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि मायावती अपने कुशासन, भ्रष्टाचार और अक्षमता से बचाव के लिए ही छोटे राज्यों की बात कर रही हैं और उसके पीछे उनका अपना राजनीतिक स्वार्थ साधन और महत्वकांक्षा छिपी हुई है।

यादव ने अब तक बनाए गए राज्यों के कारण उपजी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि बिहार को तोड़कर बनाए गए झारखंड राज्य में आज भी भूख, गरीबी और बेकारी की समस्या बदस्तूर बनी हुई और नक्सली आंदोलन का सबसे ज्यादा असर वहीं नजर आ रहा है।

उन्होंने इसी तरह छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्यों के बारे कहा कि छत्तीसगढ़ जहां माओवादी समस्या से जूझ रहा है, वहीं उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अब तक संपत्ति का बंटवारा तक नहीं हो पाया है।

यादव के मुताबिक उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल, बुंदेलखंड, हरित प्रदेश में बांटने की बात के पीछे राजनीतिक स्वार्थ है और अपनी अक्षमता छिपाने की साजिश है। केंद्र की राजनीति में उत्तर प्रदेश का सबसे ज्यादा महत्व रहता है और यहां से 80 सांसद सदन में जाते हैं इसीलिए इसकी राजनीतिक ताकत को तोड़ने का कुचक्र रचा जा रहा है।
 
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के संतुलित विकास की पक्षधर है, विभाजन की नही। वह चाहती है कि राजनीतिक शक्ति बनी रहे और प्रदेश की हैसियत कम न हो। अगर प्रशासन चुस्त हो, भ्रष्टाचार पर अंकुश हो, विकास पर ध्यान हो तो विभाजन की जरुरत ही नहीं होगी।

यादव ने प्रदेश की मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह बेवजह का मुद्दा खड़ा कर रही हैं और यह मुद्दा महज इसलिए उछाला जा रहा है कि जनता का गरीबी, बेकारी, मंहगाई और भ्रष्टाचार से ध्यान हटाया जा सके। मायावती सरकारी खजाने का बड़ा हिस्सा पार्कों, स्मारकों, पत्थरों पर खर्च कर चुकी है, अब खर्च के लिए पैकेज की मांग कर रही है।

 
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